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NRC, CAA, धारा 370 और राम मंदिर जैसे राष्ट्रवाद के मुद्दों पर संघ ने संभाला मोर्चा

दिल्ली के 13 हजार से अधिक बूथ और प्रत्येक मतदान बूथ स्तर पर कम से कम तीन बैठक करने के लक्ष्य के जरिए करीब 40 हजार बैठकों के लक्ष्य को दिन-रात पूरा किया जा रहा है। इ

RSS चीफ मोहन भागवत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः अनिल शर्मा)

दशक से दिल्ली प्रदेश की सत्ता से बाहर चल रही भाजपा को मुकाबले में अव्वल लाने के लिए राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित चुनावी लड़ाई की रणनीति पर संघ सक्रिय होकर काम कर रहा है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी), धारा-370, राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय मुद्दों की अहमियत बताते हुए संघ दिल्ली चुनाव में लोकसभा से लेकर बूथ स्तर तक सक्रिय हो गया है। दिल्ली के 13 हजार से अधिक बूथ और प्रत्येक मतदान बूथ स्तर पर कम से कम तीन बैठक करने के लक्ष्य के जरिए करीब 40 हजार बैठकों के लक्ष्य को दिन-रात पूरा किया जा रहा है। इन बैठकों में राष्ट्रवाद समेत राष्ट्रीय मुद्दों की जानकारी देते हुए लोगों के मन से भ्रम को दूर करने की कमान दिल्ली चुनाव में संघ संभाल रहा है।

हालांकि, दिल्ली के स्थानीय मुद्दों की या सीधे चुनाव प्रचार की लड़ाई में संघ सक्रिय नहीं होगा। लेकिन शाहीन बाग की जनता के साथ कौन खड़ा है? सीएए से किस भारतीय को अपनी नागरिकता का खतरा है? आदि ऐसे मुद्दे हैं, जिनका भारतीयता के साथ सीधा संबंध है। इन्हीं मुद्दों की वास्तविक जानकारी जनता तक पहुंचाने और सौ फीसद मतदान सुनिश्चित कराने की कमान दिल्ली चुनाव में संघ ने संभाली हुई है।

इस मर्तबा दिल्ली विधानसभा चुनाव में संघ ने अपना लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। हो रही बैठकों के जरिए लोगों के बीच राष्ट्रवाद समर्थित दल को समर्थन देने का संदेश दिया जा रहा है। विधानसभा वार संघ की स्थानीय इकाई इस मुहिम के तहत सक्रिय होकर छोटी बैठकें या सभाएं कर रही हैं। भले ही ऐसी कुछ बैठकों में स्थानीय मुद्दे जैसे नाली, सड़क, पानी, बिजली, सीवर, इलाज आदि के मुद्दे उठने की पूरी संभावना है लेकिन संघ ने केवल राष्ट्रवाद या राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित संपर्क की नीति स्पष्ट कर दी है।

जानकारों का मानना है कि सीएए पर भाजपा बनाम अन्य दलों के बीच की दूरी कम करने या बढ़ाने, किससे फायदा मिल सकता है, इसका भी पूरा आकलन कर लिया गया है। भाजपा के पक्ष में मतदान करने के बजाए बैठकों के जरिए संदेश साफ दिया जा रहा है कि राष्ट्रवाद, शांति व आपसी सौहार्द का भरोसा दे, जनता उसी के पक्ष में मतदान करे। रणनीति के तहत भाजपा और संघ के बीच लोकसभा स्तर से लेकर छोटे स्तर तक एक-एक समन्वयक रहेगा। जो परस्पर सामंजस्य बनाने के लिए दूरी को कम करने, जन प्रतिनिधियों को शामिल करने के अलावा रूठों को मनाकर लोगों के बीच बन रही दूरी को भी कम करने की कोशिश करेगा।

संघ बैठकों के जरिए लोगों के फीडबैक का भी डाटा इक्टठा कर चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाने में भी मदद करेगा। संघ की भूमिका और समन्वय की कार्ययोजना भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, समेत मंत्री, सांसदों के साथ संघ पदाधिकारियों की बैठक में तय कर ली गई है।
आरएसएस के प्रांतीय पदाधिकारी राजीव तुली ने बताया कि कोई चुनाव छोटा या बड़ा नहीं होता है। लिहाजा बड़े चुनाव के मुद्दे बड़े या राष्ट्रीय हों और छोटे चुनाव में स्थानीय हों, यह पूरी तरह गलत है। संघ का मानना है कि देश के हर चुनाव में राष्ट्रीयता या राष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्थानीय मुद्दों को नकारा नहीं जा सकता है लेकिन केंद्र बिंदु राष्ट्रीय मुद्दे होने चाहिए।

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