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अमीरों को न मिले आरक्षण: RSS

हरियाणा के जाटों की ओर से आरक्षण के लिए चलाए गए हिंसक आंदोलन की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने ‘समृद्ध’ समुदायों की आरक्षण की मांग को खारिज कर दिया है।
Author नागौर | March 14, 2016 03:01 am
(RSS File Photo)

हरियाणा के जाटों की ओर से आरक्षण के लिए चलाए गए हिंसक आंदोलन की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने ‘समृद्ध’ समुदायों की आरक्षण की मांग को खारिज कर दिया है। पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए आरएसएस ने विस्तृत अध्ययन का समर्थन किया है। वहीं संघ ने कहा है कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की ओर से आरएसएस की तुलना आइएस से करने पर वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

सामाजिक समरसता की वकालत करते हुए आरएसएस से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव के लिए हिंदू समुदाय के लोग ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए इसे समूल खत्म करना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए आरएसएस ने डॉक्टर बीआर आंबेडकर का सहारा लिया है।

‘समृद्ध’ समुदायों की आरक्षण की मांग को खारिज करते हुए आरएसएस के महासचिव सुरेश भैया जी जोशी ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने आरक्षण का प्रावधान सामाजिक न्याय के लिए किया था। इस बात का ध्यान उन लोगों रखना चाहिए, जो आज आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि यह सोच (‘समृद्ध’ समुदायों की ओर से आरक्षण की मांग) सही दिशा में नहीं है। इस तरह के ‘समृद्ध’ लोगों को अपने अधिकारों को छोड़कर समाज के कमजोर तबके की मदद करनी चाहिए। लेकिन इसकी जगह वो खुद के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं, यह ठीक सोच नहीं है।’

हालांकि उन्होंने इस तरह की मांग करने वाले किसी समुदाय की ओर सीधे इशारा नहीं किया। लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा जाटों की ओर था, जिन्होंने अभी हाल ही में हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चलाया था, जो काफी हिंसक हो गया था। जोशी राजस्थान के नागौर में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के तीन दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आरएसएस में फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। सम्मेलन में सामाजिक समरसता के अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रस्ताव पारित किए गए।

सामाजिक समरसता पर पारित प्रस्ताव में कहा गया है, ‘किसी भी प्रकार का भेदभाव वाला व्यवहार और छुआछूत जैसी कुरीतियों को पूरी तरह उखाड़ फेंकना चाहिए। समाज के सहज संचालन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि समाज के सभी सामाजिक और धार्मिक संगठन हमारे जीवन के पुराने आदर्शों पर आधारित पाठ का अनुसरण करें।’

जोशी ने कहा, ‘जाति आधारित भेदभाव हम सभी के लिए चिंता का विषय है और हिंदू समुदाय के सदस्य इसके लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन अब हमें इसे समूल खत्म करने की जरूरत है। समाज में इसके लिए संदेश जाना चाहिए, जिससे वहां कोई भेदभाव न हो, किसी के साथ अत्याचार न हो और सामाजिक समरसता बनी रहनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि यह पता लगाने के लिए कि पिछड़े वर्ग के पात्र लोगों को वास्तव में आरक्षण का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसका एक अध्ययन होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘बाबा आंबेडकर ने आरक्षण का प्रावधान दिया था। यह सामाजिक न्याय के लिए था। आज दलितों में शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है।’ उन्होंने कहा, ‘आज बहुत से पिछड़ी जातिया हैं। इस बात का अध्ययन होना चाहिए और चर्चा होनी चाहिए कि पात्र जातियों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है या नहीं।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह विस्तृत चर्चा का विषय है कि इन सभी श्रेणियों में कोई क्रिमी लेयर न हो।
जोशी ने कहा कि सामाजिक समरसता से जुड़े प्रस्ताव में दैनिक जीवन में समरसता को रेखांकित किया गया है। इसमें समाज से जाति अधारित भेदभाव, छुआछूत और परस्पर संदेह को उखाड़ फेंकने की बात की गई है।

वहीं शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े प्रस्ताव में कहा गया है कि ये दोनों सुविधाएं सभी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जोशी ने कहा कि इन सुविधाओं की उपलब्धता, सामर्थ्य और गुणवत्ता सभी के लिए होनी चाहिए। जोशी ने नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में कथित तौर पर लगे देश विरोधी नारे को सभी देशभक्तों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा।

लेकिन विश्वविद्यालयों में इस तरह का वातावरण पैदा किसने होने दिया। अगर विश्वविद्यालय इस तरह की देश विरोधी गतिविधियों के केंद्र बन जाएंगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है, राजनीति का नहीं। उन्होंने कहा कि क्या सत्ता में आने वाली कोई भी पार्टी पाकिस्तान के संदर्भ में अपना रुख या भूमिका बदल सकती है। जोशी ने कहा, ‘देश की अखंडता और सुरक्षा का ध्यान रखने वाली सोच देश के हित में सर्वश्रेष्ठ समझी जानी चाहिए। इस घटना के खिलाफ देशभर से आई प्रतिक्रियाएं स्वागत योग्य हैं। यह दिखाता है कि समाज जागरूक है।’

वहीं भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की ओर से आरएसएस की तुलना आइएसआइएस से करने के मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा और आजाद से माफी की मांग की जाएगी। सूत्र ने कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है और आइएस से उसकी तुलना स्वीकार नहीं की जाएगी। उनका कहना था कि आजाद ने आरएसएस पर हमला करने के लिए एक मुसलिम संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम को चुना। इससे कांग्रेस की वोटबैंक की राजनीति का पता चलता है।

वहीं नागौर में आरएसएस के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के बयान से कांग्रेस के मानसिक दिवालिएपन और कट्टरवादिता व आइएस जैसी क्रूर शक्तियों से निपटने की उसकी अनिच्छा का पता चलता है। प्रवक्ता का कहना था कि आरएसएस आजाद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

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