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योगी के गढ़ में आरएसएस ने बदला संगठन सचिव, दो और इलाके में रखे अपने आदमी

गौरतलब है कि संगठन सचिव का पद काफी महत्वपूर्ण होता है और भाजपा और आरएसएस के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है।

गोरखपुर में हुआ संगठन के स्तर पर बड़ा बदलाव। (IMAGE SOURCE-Express Photo)

हालिया उप-चुनावों में मिली हार का असर अब भाजपा में संगठन स्तर पर हो रहे बदलावों के रुप में सामने आ रहा है। बता दें कि आरएसएस ने शनिवार को संगठन सचिव के पदों पर कुछ बदलाव किए हैं। इसमें योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भी संगठन सचिव की तब्दीली भी शामिल है। खास बात ये है कि संगठन सचिव के पदों पर जो नई नियुक्तियां हुईं हैं उन पर भाजपा नेताओं की जगह आरएसएस प्रचारकों को नियुक्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, संगठन सचिव के पदों पर इन बदलावों पर फैसला हरियाणा के सूरजकुंड में हुई हालिया आरएसएस की बैठक में लिया गया था।

गौरतलब है कि संगठन सचिव का पद काफी महत्वपूर्ण होता है और भाजपा और आरएसएस के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। बदलावों की बात करें तो गोरखपुर के संगठन सचिव शिव कुमार पाठक, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के ओमप्रकाश और अवध के ब्रज बहादुर को संगठन सचिव के पदों से हटाया गया है और ये तीनों भाजपा नेता हैं। वहीं इनके स्थान पर काशी के आरएसएस विभाग प्रचारक रत्नाकर को गोखपुर क्षेत्र का संगठन सचिव नियुक्त किया गया है। रत्नाकर गोरखपुर के साथ ही काशी के प्रचारक का पद भी संभालते रहेंगे।

इनके अलावा राजस्थान के विभाग प्रचारक प्रद्युमन को अवध क्षेत्र का संगठन सचिव भी नियुक्त किया गया है। इससे पहले प्रद्युमन उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठन में विभिन्न विभागों में काम कर चुके हैं। आगरा के प्रचारक भवानी सिंह को कानुपर-बुंदेलखंड का संगठन सचिव नियुक्त किया गया है। भवानी सिंह आगरा के प्रचारक का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। पार्टी के एक नेता का कहना है कि आरएसएस नेताओं की संगठन सचिव के पद पर नियुक्ती पार्टी में आरएसएस का प्रभाव बढ़ाएगी। चुनावों में संगठन सचिव का रोल काफी अहम होता है। वहीं संगठन सचिव के पद से हटाए गए नेताओं को अभी तक कोई नया कार्यभार नहीं दिया गया है और उनकी जिम्मेदारी पर बाद में फैसला होगा। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर, कैराना, फूलपुर उप-चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, जिसे 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारियों के नजरिए से भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यही वजह है कि संगठन के स्तर पर यह बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

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