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मीडिया रिपोर्ट में दावा: मनोज तिवारी की कार्यशैली से खुश नहीं आरएसएस, दिल्ली में हार की आशंका

रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस के पदाधिकारी का कहना है कि तिवारी को संगठन का अनुभव नहीं है। इसके बावजूद वह संगठन के काम में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करते रहते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: August 22, 2019 3:07 PM
मनोज तिवारी को 30 नवंबर 2016 को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था। (फाइल फोटो)

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को यहां भाजपा के हार की आशंका सता रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संघ दिल्ली के प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी का कार्यशैली से नाखुश हैं। संघ को लगता है कि तिवारी का रवैया आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में आड़े आ सकता है।

‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस के एक पदाधिकारी का कहना है कि पार्टी जहां दिल्ली में आसानी से चुनाव जीतती नजर आ रही थी वहां अब पार्टी चुनाव हार सकती है। रिपोर्ट की मानें तो प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी की कार्यशैली से न सिर्फ संघ के लोग नाराज हैं बल्कि दिल्ली के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष है।

आरएसएस के पदाधिकारी का कहना है कि तिवारी को संगठन का अनुभव नहीं है। इसके बावजूद वह संगठन के काम में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करते रहते हैं। जब तिवारी को राज्य इकाई में लाया गया था कि इसके पीछे सोच थी कि वह बाहरी के रूप में पार्टी के भीतर की लड़ाई को खत्म करने के साथ ही पूर्वांचल के वोटरों को भी लुभाएंगे।

हालांकि, ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि संघ पार्टी में डांसर सपना चौधरी को शामिल किए जाने से नाराज है। भाजपा के एक नेता ने कहा कि आप पार्टी को ऑर्केष्ट्रा की तरह नहीं चला सकते हैं। आप गाना गाकर चुनाव नहीं जीत सकते हैं। उन्हें (तिवारी) लोगों के बीच पहुंच बनानी होगी।

पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि पहले जो भी प्रदेशाध्यक्ष रहें हैं वह कम से कम एक घंटा तो पार्टी कार्यालय में जरूर बैठते थे लेकिन तिवारी से तो मिलना भी मुश्किल हैं। राज्य इकाई को चाहिए कि वह सभी नेताओं को साथ लेकर चले और एक रणनीति बनाए। इसके उलट यहां तो हर कोई अपनी बचाने में जुटा हुआ है।

आरएसएस के पदाधिकारी ने कहा कि यदि वे दिल्ली का चुनाव जीतना चाहते हैं तो उन्हें राज्य इकाई को सही करने की जरूरत है। यहां कार्यकर्ता पूरी तरह से हतोत्साहित हो चुके हैं। एक अन्य भाजपा नेता ने कहा कि राज्य इकाई में कई नेता खुद के पास पावर होने का दावा करते हैं जिससे चीजें दिशाहीन हो जाती हैं। इससे सिर्फ भीतर की लड़ाई बढ़ती है।

भाजपा के कुछ नेता इस मुद्दे को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाना चाहते हैं। मालूम हो कि मनोज तिवारी का तीन साल का कार्यकाल इस साल नवंबर में खत्म हो रहा है। देखना होगा कि चुनाव से पहले पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में किसी नए चेहरे को लाती है या फिर एक बार फिर से मनोज तिवारी पर ही दांव लगाती है।

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