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RSS की पत्रिका में बीजेपी की चुनावी रणनीति पर उठाए गए सवाल- ‘न तो चेहरा उतारा, न लोकल मुद्दों को भुनाया, शाहीन बाग पर भी की गलतियां’

लेख में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने की टाइमिंग पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि पार्टी ने चुनाव से कुछ दिन पहले ही प्रचार शुरू किया जबकि केजरीवाल ने अपना चुनावी अभियान एक साल पहले ही लॉन्च कर दिया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भाजपा की करारी हार और पार्टी की चुनावी रणनीति पर अब आरएसएस ने सवाल उठाए हैं। भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था और पार्टी 70 में से महज 8 सीटें जीत सकी। संघ की पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ में छपे एक लेख के मुताबिक दिल्ली एक छोटा सा शहर है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा को दिल्ली में एक चेहरा उतारना चाहिए था। स्थानीय मुद्दों को भी उठाना चाहिए था। इसके उलट विपक्ष के पास एक मजबूत वोट बैंक के साथ चुनाव में एक चेहरा भी था। उधर भाजपा अपने केंद्रीय नेतृत्व पर सवार होकर चुनाव जीतना चाहती थी, जो उसकी सबसे बड़ी कमी थी।

रतन शरद के इस लेख में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने की टाइमिंग पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि पार्टी ने चुनाव से कुछ दिन पहले ही प्रचार शुरू किया जबकि केजरीवाल ने अपना चुनावी अभियान एक साल पहले ही लॉन्च कर दिया था। इसके अलावा भाजपा को सीएए जैसे मुद्दे पर एक अभियान चलाने की जरुरत थी।

इसमें कहा गया कि ये साफ है कि राजधानी कि लोग आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में अलग-अलग मुद्दों पर मतदान करते हैं। चुनाव परिणाम से एक बार फिर ऐसा साबित भी हुआ। साल 2014 के आम चुनाव में दिल्ली ने भाजपा को चुना जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में इसी दिल्ली ने आप को अधिक पसंद किया। दूसरे राज्यों का रुझान भी यही दिखाता है। सर्वे से पता चलता है कि दिल्ली की जनता सीएए का समर्थन करती है मगर इसी जनता को विधानसभा चुनाव में आप पर अधिक भरोसा था। एक भाजपा समर्थक इससे समहत नहीं होगा, मगर सच्चाई यही है।

लेख में आगे कहा गया कि दिल्ली चुनाव में शाहीन बाग रोड ब्लॉक मुद्दा विहीन निकला। भाजपा नेताओं के लिए यह आश्चर्य की बात हो सकती है। चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी अधिकतर रैलियों में शाहीन बाग का मुद्दा उठाया था। हालांकि चुनाव परिणाम आने पर शाह ने खुद कहा कि इस चुनाव को लेकर उनका मूल्यांकन गलत निकला। शाह ने इसके अलावा अपनी पार्टी के उन नेताओं पर भी निशाना साधा, जिन्होंने चुनाव के दौरान कथित तौर पर उकसाने और महौल बिगाड़ने वाले बयान दिए थे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। चुनाव पूर्व एक महीने में भाजपा ने दिल्ली के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में 6,577 मीटिंग कीं। इसमें अमित शाह ने खुद 52 रोड शो और पब्लिक मीटिंग कीं। करीब 30 बार ऐसे भाषण दिए, जिसमें उन्होंने मतदाताओं से ईवीएम का बटन इतनी जोर से दबाने को कहा कि करंट शाहीन बाग तक पहुंचे, ताकि प्रदर्शनकारी वहां से जाने को मजबूर हो जाएं।

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