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100 से अधिक मुस्लिम बुद्धिजीवियों के संग बैठक में आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल ने कहा- शर्मनाक था गुजरात दंगा, दोबारा नहीं होना चाहिए

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2002 के गुजरात दंगों में 790 मुस्लिम और 254 हिंदू मारे गए थे।

Author Updated: November 10, 2016 9:09 AM
राष्ट्रीय स्वयंसेवर संघ के कार्यकर्ता दैनिक शिविर के दौरान। (Express file photo by Amit Mehra)

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की दिल्ली में हुई बैठक में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कम से कम तीन टीचर (जिनमें से दो रिटायर हो चुके हैं) ने बताया कि आरएसएस के नेताओं ने 2002 के गुजरात दंगों को “शर्मनाक” बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया कि रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस नेताओं ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से कहा कि गुजरात दंगे जैसी घटनाएं “दोबारा नहीं होनी चाहिए।” रिपोर्ट के अनुसार ये बैठक तीन नवंबर को दिल्ली के पूसा एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के अंतरराष्ट्रीय सभागार में हुई थी। बैठक का मकसद “मुस्लिम समुदाय में संघ के बारे में पैठी गहरी भ्रांतियों को दूर करना था।”

एएमयू में धर्मशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद चार अन्य प्रोफेसरों के साथ इस बैठक में शामिल हुए थे। उन्होंने अखबार को बताया कि बैठक में जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के 100 से ज्यादा मुस्लिम बुद्धिजीवी शामिल हुए। ज़ाहिद ने बताया, “मैंने 2002 के गुजारत दंगे का मुद्दा उठाया और कहा कि वहां जो हुआ उसे मुसलमान कभी नहीं भूल सकेगा। इस पर जवाब देते हुए आरएसएस के सह सरकार्यवाह (संयुक्त महासचिव) कृष्ण गोपाल शर्मा ने कहा कि वो घटना शर्मनाक थी और ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए।”

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आरएसएस से जुड़े नेता इंद्रेश कुमार ने बैठक के बारे जानकारी देते हुए मीडिया से कहा कि पांच घंटे तक चली बैठक में कई महत्वपूर्ण और विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई थी। आरएसएस समर्थित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के शाहिद अख्तर ने टीओआई के बताया, “बैठक के दौरान सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि गुजरात जैसे हादसे दोबारा न हों इसके लिए संवाद होते रहना जरूरी है।”

2002 में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर अयोध्या से कारसेवा करके लौट रहे यात्रियों की एक बोगी के जलाए जाने के बाद राज्य के कई शहरों में दंगे भड़क गए थे। गोधरा ट्रेन हादसे में 59 लोग जलकर मर गए थे। वहीं गुजरात के विभिन्न शहरो में हुए दंगों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 790 मुस्लिम और 254 हिंदू मारे गए थे। गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2002 के गुजरात दंगों में करीब दो हजार लोग मारे गए थे जिनमें बड़ी संख्या मुसलमानों की थी।

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