लॉकडाउन के बीच Zoom पर ई-शाखा लगा रहा RSS, कहा- त‍िगुने लोग हो रहे शाम‍िल, जान‍िए कैसे हो रहा आयोजन

आरएसएस शाखा का मौजूदा फॉर्मेट लगभग पुराना ही है, लेकिन अब इसमें शारीरिक गतिविधियों की जगह लोग हर दिन आधे घंटे के लिए वर्तमान मुद्दों पर बहस कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा आमतौर पर सार्वजनिक स्थलों पर ही लगती है, जहां हर दिन कार्यकर्ता इकट्ठा होते हैं। (प्रतीकात्मक)

कोरोनावायरस के मद्देनजर लगे लॉकडाउन से पूरा देश ठहर गया है। इसके असर से जहां बड़े-बड़े उद्योग और कंपनियों के कर्मचारी घर से काम करने पर मजबूर हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं का भी रूप बदला है। पहले यह शाखाएं सार्वजनिक स्थलों पर ही आयोजित की जाती थीं। हालांकि, संघ की तरफ से सुबह, दोपहर और शाम की शाखा रद्द किए जाने के बाद से कार्यकर्ता ऑनलाइन ही ई-शाखा का आयोजन कर रहे हैं। इसके तहत संघ से जुड़े लोग ZOOM वीडियो ऐप के जरिए दूसरे लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ रहे और अपनी कार्यशैली पर जानकारी साझा कर रहे हैं।

खास बात यह है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जमीन के मुकाबले तीन गुना लोग ज्यादा जुट रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन के ऐलान के बाद ही शाखा प्रमुखों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं से जुड़ने का आदेश दिया था।

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नागपुर के शाखा प्रमुख राजेश लोया के मुताबिक, “हमने इंटरनेट के जरिए ही सुबह ZOOM जैसी ऐप के जरिए शाखा का आयोजन शुरू कर दिया है। अच्छी बात यह है कि इससे हर दिन 20-30 लोग जुड़ते हैं, जबकि सार्वजनिक स्थलों पर लगने वाली शाखा में हर दिन 8-10 लोग ही आते थे।” राजेश ने बताया कि शाखा का आधारभूत ढांचा वैसा ही रखा गया है। अब सिर्फ शारीरिक गतिविधियां नहीं होतीं, बल्कि इसकी जगह स्वयंसेवक 30 मिनट के लिए मौजूदा स्थितियों पर चर्चा करते हैं। इन दिनों हमारी चर्चा लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स में सेवा देने पर केंद्रित होती है।

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राजेश के मुताबिक, इस वक्त कार्यकर्ताओं के लिए टाइमिंग में छूट दी गई है। वे अपने हिसाब से सुबह आ सकते हैं। प्रथ शाखा (सुबह की शाखा) जो 6:30 बजे शुरू होती थी, वह अब 7:30 तक भी लगती है। इसमें शामिल होने वाले योगा या कुछ कसरत करने के बाद साथ में प्रार्थना करते हैं, न कि पुराने रूटीन की तरह जहां पहले कोई प्रार्थना कराता था। उन्होंने बताया कि अब यह मॉडल पूरे देश में लागू किया जा रहा है। हालांकि, यह हमेशा के लिए नहीं रहेगा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद शाखाएं अपने पुराने स्वरूप में ही आयोजित होंगी।

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