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RSS की स्वास्थ्य इकाई ‘आरोग्य भारती’ का दावा- उत्तम व सुंदर संतान पाने की अपनाए हमारी बताई प्रक्रिया

इस प्रोजेक्ट को करीब एक दशक पहले गुजरात में जारी किया गया था, जिसे 2015 में राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया गया।

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चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
माता-पिता का तीन महीने का शुद्धिकरण, ग्रहों के मुताबिक संभोग, गर्भवती हो जाने के बाद पूरी तरह से परहेज और प्रक्रियात्मक व सही भोजन का पालन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्वास्थ्य इकाई आरोग्य भारती के गर्भ विज्ञान संस्कार के मुताबिक, एक महिला को उत्तम संताती यानी एक परफेक्ट संतान पाने के लिए इन नियमों का पालन करना होगा। इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे कुछ पदाधिकारियों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस प्रोजेक्ट को करीब एक दशक पहले गुजरात में जारी किया गया था, जिसे 2015 में राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया गया। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट आरएसएस की शिक्षा इकाई विद्या भारती के अंतर्गत आता है और गुजरात व मध्यप्रदेश में इसकी करीब 10 ब्रांच हैं। जल्द ही उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल में भी इसकी यूनिट होगी।

इस प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर कृष्ण मोहनदास नरवानी ने कहा, “उत्तम संताती के जरिए हमारा मुख्य ध्येय समर्थ भारत का निर्माण करना है। हम चाहते हैं कि 2020 तक हजारों की संख्या में ऐसे बच्चे हों।” पदाधिकारियों के मुताबिक, यह प्रजोक्ट जर्मनी से प्रेरित है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी ने आयुर्वेद के जरिए ऐसे कई बच्चे पैदा किए हैं। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर हितेश जानी ने कहा, “कम शिक्षा या किसी अन्य कारण से अगर किसी माता-पिता का IQ कम भी है तब भी उनकी संतान उज्जवल हो सकती है। अगर सही प्रक्रिया का पालन किया जाए तो कम लंबाई और सांवले अभिभावक भी लंबी और सुंदर संतान पा सकते हैं।”

जानी काफी समय तक आरएसएस स्वयंसेवक रहे और जामनगर की गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में पंचकर्मा के हेड भी रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तम संताती पाने की प्रक्रिया हिन्दू शास्त्रों में भी बताई गई है। दावा किया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से अब तक 450 सन्तान जन्म ले चुकी हैं और 2020 तक हर राज्य में एक गर्भ विज्ञान अनुसंधान केंद्र खोला जाएगा।

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