ताज़ा खबर
 

मोदी सरकार का ‘दाग’ धोने के लिए संघ की बचाव रपट

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लग रहे ‘असहिष्णुता’ के आरोपों के चलते संघ ने उसे क्लीन चिट देने का अनोखा तरीका अपनाया है। उसके वैचारिक संगठन भारत नीति प्रतिष्ठान..

Author नई दिल्ली | November 6, 2015 1:04 AM
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्र सरकार पर लग रहे ‘असहिष्णुता’ के आरोपों के चलते संघ ने उसे क्लीन चिट देने का अनोखा तरीका अपनाया है। उसके वैचारिक संगठन भारत नीति प्रतिष्ठान ने अपनी खास पड़ताल के बाद एक रपट तैयार की है जिसमें यह दावा किया गया है कि राजग के सत्ता में आने के बाद दिल्ली के गिरजाघरों पर हुए हमले साजिश का नतीजा थे। इनका मकसद दिल्ली विधानसभा चुनाव मे ईसाई मतदाताओं को भाजपा के खिलाफ करना था।

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के पहले ही संघ ने भाजपा के बचाव की तैयारी कर ली है। असहिष्णुता के आरोपों के कारण बदनाम हो रही नरेंद्र मोदी सरकार को क्लीन चिट देने के लिए उसने अपने करीबी संगठन भारत नीति प्रतिष्ठान से एक रपट तैयार करवाई है। इस संगठन के मानद निदेशक प्रो राकेश सिन्हा हैं जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं व आए दिन खबरिया चैनलों पर होने वाली चर्चा में संघ व भाजपा सरकार का बचाव करते देखे जा सकते हैं। गुप्तचर विभाग के रिटायर अफसर आरएनपी सिंह और डॉ बीएस हरिशंकर समेत दिल्ली विश्वविद्यालय व जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के करीब आधा दर्जन प्रोफेसर इस टीम में शामिल थे। दुष्प्रचार शीर्षक वाली इस जांच रपट में जिस तरह से सरकार बचाव किया गया है, वह गजब का है।

रिपोर्ट के मुताबिरक उसकी खोजी टीम ने दिल्ली और हरियाणा के उन सात गिरजाघरों के दौरे किए जहां हमले व तोड़फोड़ की घटनाएं घटी थीं। जांच प्रक्रिया में गृह मंत्रालय से प्राप्त जानकारी और पुलिस रिपोर्ट का स्रोत के रूप में प्रयोग किया गया। जांच दल ने विभिन्न पुलिस थानों व गिरजाघरों के आसपास रहने वाले लोगों से भी बातचीत की। दिल्ली व हिसार के चर्चों पर हुए हमलों की जांच रपट में कहा गया है कि इन कथित हमलों को लेकर मीडिया और चर्चों ने यह दुष्प्रचार किया था कि इनके पीछे हिंदू संगठनों का हाथ था। और तो और भारत से लेकर अमेरिका तक के ईसाई संगठनों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हिंदू संगठनों को ही दोषी ठहराया। इसमें बंगलुरु के आर्क बिशप बर्नड मोरास को यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि जिन कट्टरपंथी वर्गों ने हमले किए हैं, उनके साथ सरकार का आशीर्वाद और प्रोत्साहन रहा। पुलिस की जांच रपट आने के पहले ही कैथोलिक गिरजाघरों ने हिंदू संगठनों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।

यह टीम अपनी जांच करने बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इन घटनाओं को सांप्रदायिक दृष्टिकोण से देखते हुए मीडिया आम लोगों का ध्यान मूल विषय से हटाना चाहता था। गिरजाघरों की सुरक्षा और सरकार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गए कदमों को मीडिया ने साफ नजरअंदाज कर दिया। रपट के मुताबिक, स्थानीय लोगों का मानना था कि हमले से जुड़े हुए व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं थे। मीडिया ने तिल का ताड़ बना दिया जिससे जनता के बीच भ्रम फैला।

रपट मे कहा गया है कि जब तक दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा नहीं हुई थी तब तक कैथोलिक चर्च इन हमलों के लिए हिंदू संगठनों पर दोष मढ़ते रहे । आम आदमी पार्टी के सत्ता में आते ही कैथोलिक गिरजाघरों ने कहा कि जनता ने भाजपा को अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए अच्छा सबक सिखाया है।

वैटिकन रेडियो ने दिल्ली के आर्कबिशप अनिल टूटो के उस बयान को प्रसारित किया जिसमें उन्होने कहा था कि दिल्ली की जनता ने भाजपा और इसके धर्म के नाम पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयास के विरुद्ध वोट दिया है। रपट को मुताबिक , चुनाव नतीजे आने के बाद कैथोलिक चर्च के स्वर बदल गए। अनिल टूटो कहने लगे कि बिना सत्य को जाने किसी पर कोई आरोप कैसे लगा सकता हैं। यह सारा काम मीडिया रपट का है। बदलते चुनावी परिदृश्य के साथ ही ऐसे मामलों का उछालना बंद कर देना तमाम सवाल खड़े कर देता है जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App