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चुनाव से पहले केरल में संपत्ति विवाद, RSS और गिरजाघर के नेताओं में मंथन; मनमोहन वैद्य से मिलने के बाद बोले फादर- BJP आई, तो देंगे समर्थन

दोनों गिरजाघरों के संबंध खराब होने के पीछे चर्चों का हस्तांतरण है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने Jacobite Syrian Christian Church को एक आदेश में कहा था कि वह 1700 में से 1064 चर्च Malankara Orthodox Syrian Church के हवाले कर दे।

manmohan vaidyaआरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य (फोटो सोर्सः ट्विटर@ManmohanVaidya)

केरल चुनाव में एक नया मंजर दिखाई दे सकता है। एक पुराने संपत्ति विवाद को लेकर RSS के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य से गिरजाघर के नेताओं ने मुलाकात की। Jacobite Syrian Church के फादर स्लीबा पॉल का कहना है कि अगर उनकी समस्या का समाधान निकलता है तो वह बीजेपी का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। अब तक यह समुदाय बीजेपी और RSS का समर्थन करने में गुरेज करता रहा है।

ध्यान रहे कि Malankara Orthodox Syrian Church और Jacobite Syrian Christian Church के बीच संपत्ति को लेकर लंबे अर्से से विवाद चल रहा है। केरल की कुल 3.5 करोड़ आबादी में 20% क्रिश्चियन है। जबकि 30% आबादी मुस्लिम समुदाय से है। दोनों गिरजाघरों के संबंध खराब होने के पीछे चर्चों का हस्तांतरण है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने Jacobite Syrian Christian Church को एक आदेश में कहा था कि वह 1700 में से 1064 चर्च Malankara Orthodox Syrian Church के हवाले कर दे।

फादर स्लीबा पॉल का कहना है कि LDF(लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) और UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) से बात करने के बाद निराशा ही उनके हाथ लगी है। सत्तारूढ़ LDF समस्या का समाधान निकालने में नाकाम रहा, जबकि UDF ने उनकी मांग को अनदेखा कर केवल इतना कहा कि उनकी सरकार बनी तो सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर उनका दल एक कानून बनाएगा। फादर का कहना है कि वह इस समस्या का समाधान चाहते हैं और अगर बीजेपी ऐसा करती है तो वह चुनाव में उनका समर्थन करेंगे। केरल में 6 अप्रैल को चुनाव होना है।

हालांकि, उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देने के लिए Orthodox चर्च और संघ की तरफ से कोई सामने नहीं आया है। उधर, ज्वाइंट क्रिश्चियन काउंसिल के रिर्फोमिस्ट ग्रुप के चेयरमैन फेलिक्स का कहना है कि उनके लोगों ने जो दिक्कतें झेली हैं, उनके लिए संघ ही जिम्मेदार है। उन्होंने इस मीटिंग को संघ के आगे आत्मसमर्पण जैसा करार दिया। उनका कहना है कि लोग इसे नहीं मानेंगे। वह दिन चले गए जब लोग आंख बंद करके गिरजाघरों से जारी फरमान को मानते थे। अब लोग समझदार हैं और अपने हानि-लाभ को देखने के बाद ही वोट डालेंगे।

AICC के आब्जर्वर और कर्नाटक के नेता इवान डिसूजा भी फादर स्लीबा पॉल की राय से किनारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्रिश्चियन समुदाय कांग्रेस नीत गठबंधन का समर्थन करता आ रहा है। वो संघ या बीजेपी को समर्थन नहीं कर सकता। उनका कहना है कि संघ अगर इस समस्या का समाधान करना चाहता था तो इतने दिन तक कहां था। चुनाव के समय ही उसे इसकी याद क्यों आई। डिसूजा का कहना है कि लोग सच को जानते हैं और उन्हें संघ के इस ढोंग का अच्छी तरह अंदाजा है।

गौरतलब है कि गिरजाघरों के नेताओं ने इस समस्या के समाधान को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। पीएम से बैठक के दो माह बाद संघ ने दोनों गिरजाघरों के प्रतिनिधियों से बात की है। इससे पहले केरल के बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन और कर्नाटक के डिप्टी सीएम सीएन अश्वथ नारायणन ने मेजर आर्कबिशप से मुलाकात की थी। नारायणन ने बाद में कहा था कि असेंबली चुनाव में बीजेपी क्रिश्चियन समुदाय के कई लोगों को टिकट देने जा रही है।

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