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दूरदर्शन पर मोहन भागवत के एक घंटे के सीधे प्रसारण से हुआ विवाद

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दूरदर्शन पर सीधे प्रसारित होने के कारण विवादित हुए अपने विजयादशमी संबोधन में शुक्रवार को हिंदुत्व को देश की राष्ट्रीय पहचान करार दिया और कहा कि एकता का ताना बाना इसकी विविधता से होकर गुजरता है। आरएसएस के 89वें स्थापना दिवस पर यहां रेशमबाग मैदान में […]

Author Published on: October 4, 2014 8:04 AM

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दूरदर्शन पर सीधे प्रसारित होने के कारण विवादित हुए अपने विजयादशमी संबोधन में शुक्रवार को हिंदुत्व को देश की राष्ट्रीय पहचान करार दिया और कहा कि एकता का ताना बाना इसकी विविधता से होकर गुजरता है।

आरएसएस के 89वें स्थापना दिवस पर यहां रेशमबाग मैदान में संघ कार्यकर्ताओं को अपने विजयादशमी संबोधन में भागवत ने पिछले चार महीने की अल्पावधि में राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर की गई पहलों के लिए मोदी सरकार की पीठ थपथपाई।

दूरदर्शन के एक घंटे तक आरएसएस के किसी समारोह का पहली बार सीधा प्रसारण किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस और माकपा ने इसे सरकारी प्रसारण सेवा का दुरुपयोग करार दिया, जबकि भाजपा ने इसका बचाव करते हुए कहा कि आरएसएस ने देशभक्ति में योगदान दिया है और उसने हमेशा सभी के लिए न्याय के दर्शन का प्रतिपालन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागवत के संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि आरएसएस प्रमुख ने सामाजिक सुधार के जो मुद्दे उठाए हैं वो आज के दिन बहुत प्रासंगिक हैं।

भागवत ने कहा कि आरएसएस 1925 से समाज को गुणी, मजबूत और संगठित बनाने के काम में लगा है। भागवत ने कहा कि हिंदुत्व एक सत्य है और यह हमारी राष्ट्रीय पहचान है। इसलिए हमें संघ शाखा को हर गांव में हर घर तक ले जाने की जरूरत है।

सरसंघचालक ने कहा, संघ कई दशकों से ऐसे कार्य कर रहा है। वह विविधता में एकता में विश्वास करता है जो बुराई और अहंकार के अलावा और कुछ भी नहीं छोड़ने को कहता। एकता का सूत्र जो देश की विविधता के जरिए आगे बढ़ रहा है, वह हिंदुत्व है।

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