भारत के युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन यह ताकत तभी देश के काम आएगी जब उन्हें सही दिशा और उद्देश्य मिले। अगर युवा सिर्फ अपने बारे में सोचते रहे और समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी से दूर हो गए तो यही जनसांख्यिकीय ताकत आगे चलकर समाज के लिए चुनौती बन सकती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को नागपुर में युवाओं और देशवासियों को इसी जिम्मेदारी का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि आज का युवा 30 साल बाद बूढ़ा हो जाएगा, इसलिए उसे केवल अपने भविष्य की नहीं, आने वाली पीढ़ी के भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए।
भागवत ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद सभा को संबोधित किया। उन्होंने देश को खुशहाल, समृद्ध और सुरक्षित बनाने का आह्वान किया, ताकि भारत दुनिया के लिए सार्थक योगदान दे सके और उसे ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखा जाए।
आजादी के लिए पूर्वजों ने करीब 90 साल तक लगातार संघर्ष किया
मोहन भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और उत्सव का दिन है। अगर 1857 से लेकर आजादी मिलने तक के दौर को देखें तो देश के पूर्वजों ने करीब 90 साल तक लगातार संघर्ष और बलिदान दिया। उन्होंने हिंदुत्व विचारक वी. डी. सावरकर का जिक्र करते हुए कहा कि आज नागरिकों की जिम्मेदारी है कि आजादी के बाद हासिल हुई देश की सभी अच्छी और प्रगतिशील उपलब्धियां राष्ट्र की ताकत बनें।
संघ प्रमुख ने तिरंगे के रंगों का अर्थ समझाते हुए कहा कि केसरिया रंग कर्म, ज्ञान और त्याग का प्रतीक है। देश को आजादी मेहनत और बलिदान से मिली और आजादी के बाद भी देश को मजबूत, समृद्ध और सुरक्षित बनाने के लिए इन्हीं गुणों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सफेद रंग पवित्रता का प्रतीक है। यह हमें अनुशासन में रहने और समय-समय पर खुद से यह सवाल करने की प्रेरणा देता है कि क्या हम वास्तव में अपने अनुशासन का पालन कर रहे हैं। वहीं हरा रंग समृद्धि का संदेश देता है।
अलग विचार होना गलत नहीं
भागवत ने कहा कि हर व्यक्ति अलग है, इसलिए लोगों के विचार भी अलग हो सकते हैं। लेकिन यह विविधता देश की एकता को कमजोर नहीं करती, बल्कि एकता को ही दिखाती है। उन्होंने अशोक चक्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें कई तीलियां हैं, लेकिन सभी एक ही केंद्र से निकलती हैं।
उनके मुताबिक अशोक चक्र व्यक्तिगत और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है। इसकी तीलियां धर्म यानी अनुशासन की सीमाओं में रहती हैं, ताकि समाज सही तरीके से चल सके।
भागवत ने कहा कि भारत को खुशहाल, समृद्ध और सुरक्षित बनाना है और यह भी सुनिश्चित करना है कि देश दुनिया में अपनी उचित भूमिका निभाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि कई लोग और ताकतें इस लक्ष्य के खिलाफ काम कर रही हैं और देश के रास्ते में चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। इसके बावजूद भारत को अपने मूल सिद्धांतों से समझौता किए बिना इन चुनौतियों का सामना करना होगा और ऐसा राष्ट्र बनाना होगा जिसे दुनिया ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखे।
स्वतंत्रता दिवस पर संघ मुख्यालय में सुबह आठ बजे कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच कार्यक्रम हुआ, जिसमें आरएसएस के स्वयंसेवक और प्रचारक शामिल हुए। भागवत सुबह साढ़े नौ बजे कस्तूरचंद पार्क में लोकमत मीडिया समूह के कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं को संबोधित करने वाले हैं। इसके बाद रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक मंदिर में संघ का स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम होगा। नागपुर के अलग-अलग हिस्सों में पारंपरिक पथ संचलन भी निकाला जाएगा। (With PTI Input)
