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रोज एक नया भारत, पहले एक और श्रेष्ठ अब उतिष्ठ, मोहन भागवत के नए नारे पर बिफरे लोग

RSS: मोहन भागवत ने देशवासियों को आपस में स्नेह रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि भाषा, पहनावे, संस्कृतियों में हमारे बीच छोटे-छोटे अंतर हैं, लेकिन हमें इसमें नहीं फंसना चाहिए।

रोज एक नया भारत, पहले एक और श्रेष्ठ अब उतिष्ठ, मोहन भागवत के नए नारे पर बिफरे लोग
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फोटो सोर्स: ANI)

RSS Chief Mohan Bhagwat: महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ‘उत्तिष्ठ भारत’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने भारत को आगे बढ़ाने और लोगों की को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हम अलग दिख सकते हैं। हम अलग-अलग चीजें खा सकते हैं। लेकिन अस्तित्व में एकता है। आगे बढ़ना कुछ ऐसा है जो दुनिया भारत से सीख सकती है। विश्व में उत्कृष्टता की कीमत होती है।”

मोहन भागवत ने कहा, “समाज और देश के लिए काम करने का संकल्प लें। हम देश के लिए फांसी पर चढ़ेंगे। हम देश के लिए काम करेंगे, हम भारत के लिए गीत गाएंगे। हमारे मन में भारत के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। हमारा जीवन देश के लिए समर्पित होना चाहिए।” आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को भारत के नाते बड़ा बनाना है। पूरी दुनिया में अमेरिका अपना डंडा चलाता है, चीन लगातार अपने सामर्थ्य का विस्तार पर काम कर रहा है।

नागुपर में भागवत ने कहा, “हमारा देश अहिंसा का पुजारी है लेकिन दुर्बलता का पुजारी नहीं है। अखंड भारत की बात होती है तो लोग डर जाते हैं। लेकिन ये तब होगा, जब डरना छोड़ देंगे, तब अखंड भारत होगा।”

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आह्वान पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा, “आरएसएस इन दिनों कांग्रेस की तरह क्यों लग रहा है?” वहीं रमन नाम के एक यूजर ने लिखा, “रोज एक नया भारत, एक भारत, श्रेष्ठ भारत और अब उत्तिष्ठ भारत।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “कागज पर एकता है पर हकीकत में नहीं है।” वहीं एक और ने लिखा कि भारतीय देश को श्रेष्ठ बनाने के लिए पहले से ही भारी टैक्स चुका रहे हैं।

वहीं मोहन भागवत ने देशवासियों को आपस में स्नेह रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि भाषा, पहनावे, संस्कृतियों में हमारे बीच छोटे-छोटे अंतर हैं, लेकिन हमें इसमें नहीं फंसना चाहिए। देश की सभी भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं। अलग-अलग जातियों के सभी लोग अपने हैं, हमें ऐसा स्नेह रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा, हमारे बीच मतभेद पैदा करने के लिए अनावश्यक रूप से जातियों की खाईं बनाई गई।

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