ताज़ा खबर
 

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा- पाकिस्तान के लिए भी अच्छा होगा अखंड भारत, हिंदू धर्म के साथ ही संभव

संघ प्रमुख ने कहा, "जब असंभव लगने वाला भारत का बंटवारा हो सकता है, तो अखंड भारत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।"

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र हैदराबाद | Updated: February 26, 2021 2:55 PM
RSS, Mohan Bhagwatसंघ प्रमुख मोहन भागवत। (एक्सप्रेस फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर ‘अखंड भारत की जरूरत’ पर जोर दिया है। उन्होंने एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में कहा कि भारत से अलग हुए पाकिस्तान जैसे देश अब संकट में हैं। भागवत ने आगे कहा कि ‘अखंड भारत’ बल या ताकत के जरिए नहीं, बल्कि ‘हिंदू धर्म’ के जरिए संभव है।

सरसंघचालक भागवत ने कहा, ‘‘दुनिया के कल्याण के लिए गौरवशाली अखंड भारत की आवश्यकता है, इसलिए देशभक्ति को जगाए जाने की जरूरत है… छोटे किए गए भारत को (फिर से) एकजुट किए जाने की आवश्यकता है। भारत से अलग हुए सभी हिस्सों, जो स्वयं को अब भारत का हिस्सा नहीं बताते है, उन्हें इसकी और अधिक आवश्यकता है।’’

‘विभाजन संभव था, तो अखंड भारत का बनना भी संभव’: भागवत ने कहा कि कुछ लोगों ने देश के विभाजन से पहले इस बात को लेकर गंभीर संदेह जताया था कि इसे बांटा भी जा सकता है या नहीं, लेकिन ऐसा हो गया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘यदि आप इस देश के बंटवारे से छह महीने पहले किसी से पूछते, तो कोई भी इसका अंदाजा नहीं लगा सकता था। लोगों ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से पूछा था कि पाकिस्तान के गठन संबंधी नई बात सामने आ रही है।’’ भागवत ने कहा, ‘‘इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि यह क्या है? उन्होंने कहा था कि यह (बंटवारा) मूर्खों का सपना है।’’

संघ प्रमुख ने बताया कि (ब्रिटेन के शासन काल में) लॉर्ड वावेल ने भी ब्रिटेन की संसद में कहा था कि भारत को भगवान ने बनाया है और इसे कौन विभाजित कर सकता है। भागवत ने कहा, ‘‘लेकिन आखिरकार ऐसा (बंटवारा) हुआ। जो असंभव प्रतीत होता था, वह हुआ, इसलिए अभी असंभव लगने वाले अखंड भारत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी आवश्यकता है।’’

‘भारत के साथ जुड़ने से ही इसका हिस्सा रहे अंगों की समस्याएं सुलझेंगी’: भागवत ने कहा कि स्वयं को अब भारत का हिस्सा नहीं कहने वाले इससे अलग हुए क्षेत्रों के लिए ‘भारत’ के साथ फिर से जुड़ना अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘इन देशों ने वह सब कुछ किया, जो वह कर सकते थे, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिला। इसका एक मात्र समाधान (भारत के साथ) फिर से जुड़ना है और इससे उनकी सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी। हम उन्हें दबाने नहीं, उन्हें जोड़ने की बात कर रहे हैं।

उन्होंने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा, “जब हम अखंड भारत की बात करते हैं, तो हमारा इरादा ताकत के बल पर यह (हासिल) करना नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के जरिए उन्हें जोड़ना है। सनातन धर्म मानवता और पूरी दुनिया का धर्म है और इसे आज हिंदू धर्म कहा जाता है।’’

‘वसुधैव कुटुंम्बकम् के जरिए हासिल हो सकती है शांति’: भागवत ने बताया, ‘‘गंधार अफगानिस्तान बन गया। क्या वहां तब से शांति है? पाकिस्तान का गठन हुआ। क्या वहां उस समय से शांति है?’’ भागवत ने कहा कि भारत में कई चुनौतियों से निपटने की क्षमता है और दुनिया मुश्किलों से पार पाने के लिए उसकी ओर देखती है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम् के जरिए दुनिया फिर से खुशहाली और शांति हासिल कर सकती है।

Next Stories
1 Assembly Elections 2021 Dates HIGHLIGHTS: बंगाल में आठ फेजों में होगा मतदान, भाजपा ने जताई खुशी, विजयवर्गीय बोले- अब चुनाव में गड़बड़ियां रोकने पर ध्यान दे EC
2 किसान महापंचायत में पहुंचे जयंत चौधरी ने कहा, सरकार नहीं मानेगी तो बदल जाएगी सत्ता
3 सिर्फ मोटेरा स्टेडियम ही नहीं, नरेन्द्र मोदी काल में रेलवे स्टेशन से लेकर एयरपोर्ट तक के बदल चुके हैं नाम
CSK vs DC Live
X