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‘अच्छा होता कि मोहन भागवत अर्थव्यवस्था पर केंद्र से श्वेतपत्र लाने को कहते’, RSS चीफ के बयान पर कांग्रेस का वार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि 'तथाकथित' अर्थिक मंदी के बारे में 'बहुत अधिक चर्चा' करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे कारोबार जगत तथा लोग चिंतित होते हैं।

Author नई दिल्ली | October 8, 2019 10:00 PM
RSSआरएसएस चीफ मोहन भागवत। (PTI Photo)

आर्थिक मंदी पर चर्चा नहीं करने संबंधी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान को लेकर कांग्रेस ने उन पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि आंख मूंद लेने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा और बेहतर होता कि संघ प्रमुख सरकार से श्वेत पत्र लाने के लिए कहते। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि सरकार और संघ प्रमुख भले ही आर्थिक मंदी की बात नहीं करें, लेकिन पूरा देश जानता है कि इस समय अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति है।

गौरव वल्लभ ने कहा कि, “आर्थिक विकास दर गिरकर पांच फीसदी हो गई है। विनिर्माण विकास दर 0.6 फीसदी रह गई है। बेरोजगारी पिछले 45 वर्षों में सबसे अधिक है। वाहनों की बिक्री में 33 फीसदी की गिरावट आ गई। ऑटो क्षेत्र में 10 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं। फिर भी संघ प्रमुख कहते हैं कि मंदी पर बात नहीं करो।” कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि, “भागवत जी को समझना चाहिए कि किसी समस्या पर आंख मूंद लेने से उसका समाधान नहीं होता है, बल्कि पहले समस्या को स्वीकारना होता है और फिर उसका समाधान किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “बेहतर होता कि अगर संघ प्रमुख इस सरकार से अर्थव्यवस्था की स्थिति पर श्वेतपत्र लाने के लिए कहते।” बता दें कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि ‘तथाकथित’ अर्थिक मंदी के बारे में ‘बहुत अधिक चर्चा’ करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे कारोबार जगत तथा लोग चिंतित होते हैं और आर्थिक गतिविधियों में कमी आती है। भागवत ने कहा कि सरकार स्थितियों में सुधार के उपाय कर रही है और हमें विश्वास रखना चाहिए। वह विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सभा को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोग देश को बांटने का काम रहे हैं, जबकि हम (आरएसएस) एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। इस पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि ‘जिस दिन मोहन भागवत जी एकजुटता का संदेश देकर उसका पालन करने लगेंगे, प्रेम एवं सदभाव तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का रास्ता अपना लेंगे उस दिन सारी समस्या समाप्त हो जाएगी, भीड़ हत्या खत्म हो जाएगी और नफरत भी समाप्त हो जाएगा, शिकायते भी नहीं रहेंगी।’

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