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पश्चिम बंगाल में ताकत बढ़ाने में जुटा आरएसएस, कोलकाता में तीन दिन कैंप करेंगे चीफ मोहन भागवत

इस तीन दिवसीय दौरे में मोहन भागवत संगठन की मौजूदा स्थिति, सामाजिक कार्यों और संपर्क कार्यक्रमों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

Author नई दिल्ली | Published on: August 30, 2019 7:29 AM
भागवत आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही भाजपा नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में सफलता के बाद भाजपा विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को दोहराना चाहती है। इसके लिए पार्टी की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। पार्टी को जीत दिलाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी पूरी तरह से जुट गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस क्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पश्चिम बंगाल के दौरे पर जाएंगे। संघ प्रमुख का यह दौरा 31 अगस्त से शुरू होगा। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सूत्रों के अनुसार इस तीन दिवसीय दौरे में मोहन भागवत संगठन की मौजूदा स्थिति, सामाजिक कार्यों और संपर्क कार्यक्रमों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इसके अतिरिक्त वह उत्तर और दक्षिण बंगाल के संघ प्रचारकों के साथ भी मुलाकात करेंगे। संघ प्रमुख के साल्ट लेक हाउस में वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी से मिलने का कार्यक्रम है। बंगाल से रवाना होने से पहले भागवत के राज्य के राजनीतिक हालात पर चर्चा करने का भी अनुमान है। संघ प्रमुख कोलकाता में शहर की मशहूर हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे।

खबर है कि राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने मोहन भागवत से शिष्टाचार के नाते मुलाकात करने की अनुमति मांगी थी, उन्हें इसकी इजाजत मिल गई है। मालूम हो लोकसभा चुनाव में भाजपा को 42 में से 18 सीटें मिली थीं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि आरएसएस ने बंगाल पर अपना फोकस बढ़ा दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल भाजपा में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के शामिल किए जाने को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच मोहन भागवत की इस यात्रा के महत्वपूर्ण मायने हैं। राज्य में टीएमसी से भाजपा मे शामिल होने वाले नेताओं के कद और पद को लेकर निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में विरोध देखने को मिल रहा है।

पार्टी के कई कार्यकर्ता ममता की पार्टी से आए नेताओं को पार्टी में बड़े व महत्वपूर्ण पद दिए जाने के राज्य इकाई के निर्णय से खुश नहीं है। यह मुद्दा राज्य इकाई के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच चुका है। पार्टी के कई नेता तृणमूल कांग्रेस के दागी नेताओं को पार्टी में शामिल किए जाने को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

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