राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले का शनिवार को बचाव किया।जिसमें होसबोले ने पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाजे खुले रखने की वकालत की थी। भागवत ने स्पष्ट किया कि होसबाले की टिप्पणी पाकिस्तान की सरकार नहीं, बल्कि वहां की जनता के संदर्भ में थी।

आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के मुद्दे पर संगठन केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप खड़ा है और उसकी कोई अलग या स्वतंत्र विदेश नीति नहीं है।

दत्तात्रेय होसबले ने क्या कहा था?

मई में समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में होसबले से पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और आतंकवाद को प्रायोजित करने के मामले में क्या करना चाहिए। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि भारत की सुरक्षा बनाए रखते हुए संवाद के द्वार खुले रखे जाने चाहिए।

समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि किसी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना आवश्यक है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही, हमें दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा उनसे बातचीत करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

मोहन भागवत ने क्या कहा?

होसबले की टिप्पणियों का बचाव करते हुए भागवत ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान में कई लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि विभाजन नहीं होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि वहां के कई पत्रकार आरएसएस द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हैं।

भागवत ने कहा, “लेकिन पाकिस्तान में बहुत से लोग मानते हैं कि भारत का विभाजन गलत था और वहां के कई पत्रकार आरएसएस और उसके कार्यों की प्रशंसा करते हैं। वहां पाकिस्तान विरोधी और दो-राष्ट्र सिद्धांत के विरुद्ध लोगों की एक स्पष्ट अंतर्धारा मौजूद है और उनका कहना है कि साथ रहना बेहतर था।”

भागवत ने आगे कहा कि भविष्य में यदि भारत पाकिस्तान को पूरी तरह हरा देता है, तो उसे वहां के लोगों को भारत की मुख्यधारा में शामिल करना होगा या फिर उन्हें वहां शांति से रहने देना होगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों परिस्थितियों में संवाद के रास्ते खुले रखना आवश्यक है, इसलिए, बातचीत के दरवाजे खुले रहने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम हिटलर जैसे नहीं हैं। यह हमारा स्वभाव या हमारा तरीका नहीं है। इसलिए हमें कुछ रास्ते खुले रखने होंगे। हमें अन्याय और अत्याचार को खत्म करना चाहिए, लेकिन हमें अच्छाई को भी संरक्षित करना चाहिए। हालांकि, आरएसएस प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश मामलों के संबंध में संगठन की कोई स्वतंत्र नीति नहीं है और वह केंद्र के रुख के साथ खड़ा है।

‘RSS को सबसे गलत समझा जाता है…’, मोहन भागवत ने बताया संघ को जानने का सही तरीका

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन इसे सबसे ज्यादा गलत समझा जाता है।” आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि यह कार्यक्रम लोगों को संगठन के बारे में बेहतर समझ देने के लिए आयोजित किया गया है। पढ़ें पूरी खबर।