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जैन मुनि तरुण सागर का निधन, इनकी वजह से आरएसएस ने बदला था अपना गणवेश

नागपुर में वर्ष 2009 में आयोजित आरएसएस के विजया दशमी समारोह में दिगंबर जैन मुनि ने शिरकत की थी। इस दौरान उन्होंने चमड़े के बेल्ट को बदलने की सलाह दी थी ताकि जानवरों की हत्या पर रोक लग सके।

जैन मुनि तरुण सागर का निधन हो गया (फाइल फोटो: PTI )

दिल्ली के शाहदरा के कृष्णानगर में शनिवार (1 सितंबर) सुबह 3:18 बजे जैन मुनि तरुण सागर ने 51 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे काफी समय से पीलिया से पीडि़त थे, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बताया जा रहा है कि जैन मुनि ने दवा लेने से भी इंकार कर दिया था। तरुण सागर के जैन समुदाय के अलावा भी काफी सारे फॉलोअर हैं। वे अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहते थे। इन सब बातों के साथ एक सच्चाई यह भी है कि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने अपना गणवेश इन्हीं की वजह से बदला था। पहले आरएसएस का ड्रेस शार्ट पैंट था, जो कि अब फुलपैंट हो गया है। नागपुर में वर्ष 2009 में आयोजित आरएसएस के विजया दशमी समारोह में दिगंबर जैन मुनि ने शिरकत की थी। इस दौरान उन्होंने चमड़े के बेल्ट को बदलने की सलाह दी थी ताकि जानवरों की हत्या पर रोक लग सके। बताया जाता है कि उनकी इस अपील ने काम किया और आरएसएस ने अपना पहनावा बदल लिया।

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मध्य प्रदेश के दोहोह जिले में 26 जून 1967 को जन्मे दिगंबर जैन मुनि ‘कड़वे प्रवचन’ के लिए प्रसिद्ध थे। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित काफी नेता उन्हें सम्मान देते थे। उनकी मृत्यु के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया। लिखा कि, “जैन मुनि तरुण सारग के निधन की खबर सुनकर दुख पहुंचा। हम उन्हें उनके प्रवचनों और समाज के प्रति योगदान के लिए हमेशा याद करेंगे।”

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “जैन मुनि श्रद्धेय तरुण सागर जी महाराज के असामयिक महासमाधि लेने के समाचार से मैं स्तब्ध हूं। वे प्रेरणा के स्रोत, दया के सागर एवं करुणा के आगार थे। भारतीय संत समाज के लिए उनका निर्वाण एक शून्य का निर्माण कर गया है। मैं मुनि महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

आरएसएस ने कहा, “युगद्रष्टा, क्रांतिकारी राष्ट्रसंत पूज्य मुनिश्री तरूणसागर जी महाराज का समाधि सल्लेखना पूर्वक देवलोकगमन हम सबके लिए अतीव वेदनादायक है। उनका अचानक अति अल्पायु में हम सब के बीच में से जाना पूरे देश, धर्म व समाज के लिए विशेषकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके प्रसिद्ध प्रवचन ‘कड़वे बोल’ पूरे समाज को युगानुकूल दिशा देने वाले बोल होते थे। उनका दृष्टिकोण समन्वयवादी व व्यवहार सबको साथ लेकर चलने का था, जो सबके लिए सदैव मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत रहेगा। इस असहनीय वियोग को सहने का धैर्य व उनके दिखाये सन्मार्ग पर सदैव हम चल सकें, इसके लिए प्रभु से प्रार्थना है। उनकी पवित्र स्मृति में हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।”

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