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कसाइयों को क्‍यों नहीं कहा गुंडा? गौरक्षकों पर बयान देकर संघ परिवार के निशाने पर आए नरेंद्र मोदी

जब पीएम नरेंद्र मोदी ने गौरक्षकों पर कड़ी टिप्पणी की तो बिफर पड़े कई संगठन।

गाय के साथ नरेंद्र मोदीपीएम नरेंद्र मोदी के गौरक्षकों पर दिए बयान से नाराज हैं कई संगठन। (फाइल फोटो)

अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गाय और बीफ के नाम पर पिछले कुछ समय से देश में हो रही हिंसा पर चुप रहने को लेकर हमले किए जा रहे थे। लेकिन जब शनिवार को पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी तो वो राजनीतिक दलों, सोशल मीडिया समेत बीजेपी के समर्थकों के भी निशाने पर आ गए। गौरक्षकों पर दिए गए उनके बयान पर न केवल उनके आलोचक बल्कि संघ परिवार का हिस्सा कहे जाने वाले संगठन भी दो फाड़ में बंटे नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने शनिवार को कहा था कि गौसवकों के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी दुकानें खोल ली हैं और कुछ लोग रात में गैर-कानूनी काम करते हैं और दिन में गौसेवक बन जाते हैं। उसके बाद रविवार को तेलंगाना में एक रैली में पीएम मोदी ने कहा कि ये फर्जी गौरक्षक जो हैं, इनकी पहचान की जानी चाहिए और फिर सजा दी जानी चाहिए।

पीएम मोदी के बयान पर विश्व हिन्दू परिषद, हिन्दू महासभा, बजरंग दल और शिव सेना ने तल्ख टिप्पणियां की हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पीएम का समर्थन किया है। आरएसएस ने देश में दलितों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ त्वरित कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। आरएसएस ने कहा है कि दलितों का उत्पीड़न करना न केवल गैर-कानून बल्कि अमानवीय भी है। लेकिन संघ के इस बयान से शायद उसके सभी कार्यकर्ता सहमत नहीं हैं। भोपाल स्थित संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक संगीत वर्मा ने अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, “दुर्भाग्यवश, मोदीजी ने जो कहा है उससे लगता है कि उन्हें सभी को एक ही खांचे में डाल दिया है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर उनका बयान थोड़ा अलग होना चाहिए था….मेरे जैसा कार्यकर्ता इससे आहत हैं।”

बीजेपी गठबंधन की पुरानी सहयोग और महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार की साझीदार शिव सेना ने कहा है कि पीएम मोदी का गौरक्षा पर दिया गया बयान गुजरात में पार्टी के सिकड़ते वोट बैंक को बचाने का प्रयास है। वहीं राम मंदिर आंदोलन और गौरक्षा कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) के एक नेता ने कहा कि उत्‍तर प्रदेश चुनावों से पहले यह मुसलमानों को खुश करने के लिए दिया गया बयान है। नेता ने पीएम मोदी को चेतावनी देते हुए कहा कि वो 2019 में नरेंद्र मोदी हिंदुओं का वोट खो सकते हैं। आगरा की विश्व हिंदू परिषद की युनिट के उपाध्यक्ष सुनील पाराशर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसा बयान देकर गौरक्षकों का अपमान किया है। सुनील ने कहा, ‘हजारों कसाई लाखों गायों को हर साल काट रहे हैं उन्हें गुंडा नहीं बोला गया बल्कि गुंडा गीता रंबिया (जो अहमदाबाद में सालों पहले मारे गए थे) जैसे लोगों को बताया गया। इससे दिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी का दिल अब बदल गया है। मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में इसकी कीमत चुकानी ही होगी।’

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1925 में आरएसएस के गठन के समय से ही उसके सहयोगी माने जाने वाले हिन्दू महासभा के कुछ नेता भी पीएम मोदी के बयान पर काफी आक्रोशित हैं। यूपी के अलीगढ़ में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के सदस्‍यों ने रविवार को नरेंद्र मोदी के पोस्‍टर को यह कहते हुए दूध पिलाया कि मोदी आस्‍तीन के सांप हैं। हिंदू महासभा की अलीगढ़ इकाई प्रमुख पूजा शकुन पांडे का कहना है कि मोदी को गौरक्षा के नाम पर दुकान चलाने वालों के नाम बताना चाहिए। उन्‍होंने वोट पाने के लिए गौरक्षा के नाम पर लोगों को लुभाने की कोशिश की है। असल में वह आस्‍तीन का सांप निकले।

वहीं बजरंग दल के संयोजक देवीसिंह सोंधिया ने हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार से कहा, “बजरंग दल 25 सालों से गौरक्षा कर रहा है और राजनेता चाहे जो कहें वो आगे भी इसे जारी रखेगा। बजरंग दल का सच्चा कार्यकर्ता की उगाही नहीं करता, न ही कानून को अपने हाथ में लेता है। लेकिन अगर मोदीजी ने कानून को हाथ में लेने वालों की बात की है तो उन्हें ये भी कहना चाहिए था कि देश में किसी भी कसाई को गाय की हत्या करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

न केवल दक्षिणपंथी संगठन बल्कि साधु-संन्यासी भी पीएम मोदी के रुष्ट नजर आ रहे हैं। शनिवार को दिए गए पीएम के बयान के बाद काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य स्‍वामी नरेंद्रांनद सरस्‍वती ने रविवार को उन्‍होंने कहा कि मोदी के बयान से गायों की हत्‍या को प्रोत्‍साहन मिलेगा और हत्‍यारों को आर्थिक फायदा होगा। शंकराचार्य ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”प्रधानमंत्री के बयान से गायों को मारने वाले लोगों को कुछ आर्थिक फायदा पहुंचा है। गौ संरक्षण के विषय पर विश्‍व हिंदू परिषद, गौ संवर्धन परिषद और संघ सबसे ज्‍यादा बात करते हैं, तो क्‍या विश्‍व हिंदू परिषद, राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल ही यह दुकानें चलाते रहे हैं?”  शंकराचार्य के अलावा आचार्य चक्रपाणि ने भी पीएम मोदी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

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पीएम नरेंद्र मोदी का टाउनहाल कार्यक्रम में दिया गया भाषण-

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