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अब RSS की किसान शाखा ने किया कर्ज माफी का विरोध, कहा- किसानों को वोट बैंक न समझें

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सचिव मोहिनी मोहन ने कहा, ''कृषि ऋण माफ करना राजनीतिक दलों के द्वारा प्रचलित तुष्टिकरण नीतियों की तरह हल नहीं है। इससे कभी अच्छा परिणाम नहीं मिला है। हाल की घोषणाएं इसी प्रकार की नीति की फिर से तस्दीक करती हैं। जिस प्रकार से नेता मुस्लिम वोट जीतने का प्रयत्न करते हैं, उसी प्रकार वे हमारे साथ करने की कोशिश कर रह हैं लेकिन यह काम नहीं करेगा।...

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express Archives)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की किसान शाखा ने किसानों की कर्ज माफी का विरोध किया है। आरएसएस समर्थित भारतीय किसान संघ ने कहा है कि ऋण माफी एक प्रकार की ‘तुष्टिकरण नीति’ बन गई है जो अल्पसंख्यक वोट बैंक की तरह फायदा नहीं देगी। हाल में असम की बीजेपी सरकार ने किसानों का 600 करोड़ रुपये का ऋण माफ कर दिया, जबकि गुजरात की विजय रूपाणी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहे रहे लोगों के बिजली बिल माफ करने की घोषणा कर दी। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ में नई बनी कांग्रेस सरकार ने किसानों के ऋण माफी की घोषणा कर दी। इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट भी किया, ”हो गया! राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने ऋण माफ कर दिया है। हमने 10 दिन मांगे थे। हममे इसे 2 ही दिनों में कर दिया।” न्यूज 18 की खबर के मुताबिक भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सचिव मोहिनी मोहन ने कहा, ”कृषि ऋण माफ करना राजनीतिक दलों के द्वारा प्रचलित तुष्टिकरण नीतियों की तरह हल नहीं है। इससे कभी अच्छा परिणाम नहीं मिला है। हाल की घोषणाएं इसी प्रकार की नीति की फिर से तस्दीक करती हैं।

जिस प्रकार से नेता मुस्लिम वोट जीतने का प्रयत्न करते हैं, उसी प्रकार वे हमारे साथ करने की कोशिश कर रह हैं लेकिन यह काम नहीं करेगा। नीति आयोग ने पहले क्या कहा, उसे दोहराते हुए मोहन ने कहा, ”हमने पिछले उदाहरणों से नहीं सीखा है कि जब किसानों का ऋण माफ किया गया था लेकिन उससे उनकी स्थिति में सुधार नहीं आया था।” उन्होंने कहा कि सरकारों की ऋण माफी घोषणाओं में भी कमियां रहीं। महाराष्ट्र का उदाहरण लें तो देवेंद्र फडणवीस ने ऋण माफी की घोषणा की थी लेकिन जिस तरह से उसकी योजना बनाई गई, उतने अच्छे तरीके से वह संपन्न नहीं हो पाई। उसके कोऑर्डिनेशन और प्लानिंग में कमियां रह गई थीं।

तेलंगाना और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ”किसानों को इनपुट सब्सिडी मुहैया कराना शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। 2016 में तेलंगाना सरकार ने घोषणा की थी कि राज्य के सभी जमीन मालिक किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मदद दी जाएगी। यह मदद इनपुट सब्सिडी स्कीम के तहत उवर्रकों और बीजों के तौर पर दी जानी थी। उसी प्रकार मध्य प्रदेश में मूल्य खरीद की समस्या का समाधान करने के लिए भावांतर भुगतान योजना सक्षम रही।” भावांतर भुगतान योजना के तहत किसानों को तब मुआवजा दिया जाता है जब उनकी फसल बाजार में समर्थन मूल्य से कम दाम भी बिकती है। मोहिनी मोहन ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की तरह मंत्रियों को जीरो परसेंट इंटरेस्ट लोन ऑफर करना चाहिए।

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