राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में होने जा रही है। इस बैठक में यूजीसी के नियमों के मुद्दे पर चर्चा होगी।

आरएसएस से जुड़े एक स्वयंसेवक ने कहा, ‘यूजीसी के मुद्दे ने समाज में बंटवारा कर दिया है और इस पर चर्चा होगी। एक तरफ ऊंची जाति के लोगों को ऐसा लगता है कि इन नियमों से उनकी उपेक्षा हुई है, दूसरी ओर अदालत द्वारा इस पर रोक लगाने से दलित समुदाय के लोग इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। हम ऐसा नहीं चाहते, हम चाहते हैं कि समाज एकजुट रहे।’

इसके अलावा अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव और जनसंख्या असंतुलन, सामाजिक सद्भाव और जातिगत एकता; राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सतर्कता, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आरएसएस में फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। इसकी वार्षिक बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित शीर्ष स्तर के तमाम पदाधिकारी, प्रचारक और देश भर के प्रतिनिधि अहम मामलों पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा होते हैं।

इस बैठक में भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ जैसे आरएसएस से जुड़े 30 से ज्यादा संगठन भी शामिल होते हैं।

यूजीसी के नियमों को लेकर विवाद

यूजीसी के नियमों को लेकर पिछले दिनों काफी विवाद हो चुका है। सवर्ण समुदाय के लोग जहां इससे नाराज हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक लगाए जाने के बाद ओबीसी और दलित समुदायों की नाराजगी भी सामने आई है। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा बीजेपी के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, जनसंख्या संतुलन को लेकर असम और पश्चिम बंगाल पर चर्चा हो सकती है। इन दोनों ही राज्यों में जल्द ही चुनाव होने हैं। आरएसएस इस साल अपना शताब्दी वर्ष भी मना रहा है। इसलिए इस अहम बैठक में शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों और अभियानों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। संघ की ओर से बताया गया है कि इस बैठक में कुल 1,489 स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों के भाग लेने की उम्मीद है।

UGC के नियमों से हिंदुत्व के एजेंडे को हुआ नुकसान? 

यूजीसी के नियमों को लेकर देशभर में विवाद हो चुका है। इस मामले में बीजेपी की परेशानियां बढ़ गई हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।