राजस्थान में सरकारी स्कूलों की खराब हालत को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। इस बीच RSS से जुड़े अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने CJP की गतिविधियों का विरोध करते हुए राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने लाखों सदस्यों को सक्रिय किया है।

सितंबर के अपने ताजा न्यूजलेटर में ABRSM ने कहा है कि सरकारी स्कूलों को ‘राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त’ रखा जाना चाहिए। महासंघ ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। उसने स्कूलों में बाहरी दखल और शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने का भी कड़ा विरोध किया है।

21 अगस्त को जयपुर की बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा गांव में राजस्थान सरकार के एक स्कूल में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद और टतकराव के बाद यह बयान आया है। प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद राजस्थान सरकार ने स्कूल में मरम्मत और सुधार कार्य कराने की घोषणा की थी। CJP ने इसे अपनी मुहिम की जीत के तौर पर देखा था।

ABRSM के अनुसार, राजस्थान में उसके 2.80 लाख सरकारी स्कूल शिक्षक सदस्य हैं जबकि पूरे देश में यह संख्या 13.60 लाख है। राज्य में संगठन से जुड़े करीब 45000 कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी हैं।

CJP के अभियान का विरोध

जयपुर के बाहरी इलाके में एक स्कूल का दौरा करने जा रहे सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल पर हमला हुआ था। इसका जिक्र करते हुए महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने दौरे का विरोध करने वाले ग्रामीणों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा या शारीरिक हमला सही नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन यह सवाल भी गंभीर है कि राजनीतिक विवादों को सरकारी स्कूलों में क्यों लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन को सरकारी स्कूल की व्यवस्था, सुविधाओं या शिक्षा के स्तर को लेकर कोई आपत्ति है तो शिक्षा विभाग और प्रशासन के तय माध्य उनके लिए खुले हैं। उन्होंने कहा, ”तय प्रक्रिया का पालन किए बिना स्कूल में प्रवेश करना और राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।” पिछले महीने ABRSM ने भी CJP की गतिविधियों के विरोध में राज्यभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं।

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में ABRSM के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि संगठन लंबे समय से अलग-अलग सरकारों के सामने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के खाली पद जैसे मुद्दे उठाता रहा है। CJP के अभियान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केवल समस्याओं को सामने रखने के बजाय उनके समाधान की दिशा में भी काम होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ABRSM राजस्थान समेत कई जगहों पर ‘हमारा विद्यालय, हमारा तीर्थ’ अभियान चला रहा है। राजस्थान में इस अभियान के तहत करीब 10000 स्कूलों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि ABRSM ने हाल ही में इसी अभियान के तहत राजस्थान के 1000 सरकारी स्कूलों को गोद लिया है। इन स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति समेत पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए समाजसेवियों, शिक्षकों, अभिभावकों, ABRSM और सरकार की मदद ली जा रही है।

गुप्ता ने कहा, ”अगर जयपुर के रामपुरा वाले स्कूल को ही देखें तो उसकी जमीन भी स्थानीय लोगों ने ही दी थी।” उन्होंने कहा कि पिछले 60-70 वर्षों से चली आ रही स्कूलों की समस्याओं को एक साल में दूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि ABRSM लंबे समय से केंद्र स्तर पर शिक्षा का बजट बढ़ाकर GDP का 6 प्रतिशत करने की मांग उठाता रहा है।

ABRSM के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करना ने कहा कि इस अभियान के पीछे विचार यह है कि स्कूलों में भी वही ‘सुविधाएं और शांति’ होनी चाहिए जो आमतौर पर तीर्थस्थलों पर देखने को मिलती है।

पुष्करना ने पिछले साल राज्य सरकार की ओर से कराए गए ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि स्कूलों में 86934 कमरे पूरी तरह जर्जर पाए गए थे। उन्होंने कहा कि इन कमरों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार की ओर से तय 3000 करोड़ रुपये की राशि पर्याप्त नहीं है।

‘स्कूलों की मरम्मत के लिए धन जुटाए सीजेपी’

राज्य में CJP के स्कूलों का दौरा करने को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन के पास करोड़ों सोशल मीडिया फॉलोअर्स हैं। ऐसे में CJP को ‘सिर्फ प्रचार करने के बजाय’ अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स की मदद से इन स्कूलों की मरम्मत के लिए धन जुटाना चाहिए।

ABRSM के अपने प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्य भी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए अपने स्तर पर लगातार योगदान दे रहे हैं।

ABRSM ने राज्य सरकार के उस हालिया निर्देश का भी समर्थन किया है जिसमें बाहरी लोगों के स्कूलों में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है। संगठन के संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने कहा कि संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों और राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए ये दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि स्कूलों में सुरक्षित, अनुशासित और बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा सके।

ABRSM के अतिरिक्त महासचिव बसंत जिंदल ने कहा कि राजनीति में शामिल होना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है। लेकिन राजनीतिक टकराव के लिए सरकारी स्कूलों को मंच के तौर पर इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है। संगठन के प्रदेश संयुक्त मंत्री देवेंद्र शर्मा ने भी कहा कि स्कूलों को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”सरकारी स्कूलों में राजनीतिक विवाद खड़ा करना छात्रों, शिक्षकों या राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है। अगर किसी स्कूल में वास्तव में कोई समस्या है तो संगठन प्रशासन के सामने तथ्यात्मक और लोकतांत्रिक तरीके से उसे उठाने का समर्थन करता है।”

21 अगस्त को सीजेपी के कार्यकर्ताओं के रामपुरा स्थित स्कूल पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद वहां जोरदा विवाद हुआ और सीजेपी के स्वंयसेवकों पर हमला भी किया गया।

अखिलेश यादव से मिले कॉकरोच जनता पार्टी के एक नेता?

कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने गुरुवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात शाम 4 बजे एसपी मुख्यालय के पास स्थित जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट कार्यालय में हुई। दोनों ने लगभग डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बैठक की।

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने पीटीआई को बताया कि आशुतोष रांका और अखिलेश यादव ने गुरुवार शाम राज्य की राजधानी में मुलाकात की। हालांकि, उन्होंने कहा कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।