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सांसद का वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा करने की मांग उठी राज्यसभा में

राज्यसभा में शुक्रवार को सदस्यों ने सांसदों के वेतन भत्तों में वृद्धि किए जाने की मांग की और कहा कि उनका वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा होना चाहिए।

Author नई दिल्ली | August 13, 2016 02:20 am

राज्यसभा में शुक्रवार को सदस्यों ने सांसदों के वेतन भत्तों में वृद्धि किए जाने की मांग की और कहा कि उनका वेतन कैबिनेट सचिव से ज्यादा होना चाहिए। सपा के रामगोपाल यादव ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सांसदों का वेतन पीए से भी कम हो गया है।

उन्होंने कहा कि सांसदों का वेतन दिल्ली के विधायकों से भी कम है। सांसदों का वेतन महाराष्ट्र में विधायकों के संशोधित वेतन का आधा भी नहीं है वहीं तेलंगाना के मामले में यह एक तिहाई है। सांसदों के पास काफी संख्या में लोग मदद के लिए आते रहते हैं और ऐसे में उन्हें अपने घर से खर्च करना होता है। उन्होंने कहा कि हमें बताया गया था कि इस सत्र के अंत तक इस संबंध में कोई फैसला होगा लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। हमसे कहा गया कि खर्च कम करो। उन्होंने सवाल किया कि सांसद कैसे खर्च कम कर सकते हैं।

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार संसदीय समिति की सिफारिशों पर चुप है। प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होते हैं लेकिन सांसदों के वेतन में वृद्धि नहीं की जा रही है। कांग्रेस के हुसैन दलवई ने भी उनकी मांग का समर्थन किया। शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के मुकुल राय ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उसकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि बिना किसी आधार के 76 अधिकारियों का चुनाव आयोग द्वारा स्थानांतरण कर दिया गया। इससे चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है। भाजपा के श्वेत मलिक ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर अटारी में सुरक्षा खामियों को मुद्दा उठाया और कहा कि वहां उचित जांच की सुविधा नहीं होने के कारण हथियारों एवं अन्य सामान की तस्करी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वहां लगे 231 कैमरों में सिर्फ 13 ही काम कर रहे हैं वहीं 18 बूम बैरियर बंद थे।

शून्यकाल में ही द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक सदस्यों के बीच उस समय नोंकझोेंक हुई जब अन्नाद्रमुक की विजिला सत्यनाथ ने पल्लार नदी पर आंध्र प्रदेश में बांध बनाए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर द्रमुक के टी शिवा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अन्नाद्रमुक सदस्य को यह मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि इसी मुद्दे पर उनके एक नोटिस को विगत में अस्वीकार कर दिया गया।

उपसभापति पीजे कुरियन ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि सभापति ने इसे स्वीकार किया है और उनके फैसले पर सवाल नहीं किया जा सकता। कांग्रेस की कुमारी शैलजा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ा एक मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि हरियाण में किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। किसानों से जबरन बीमा प्रीमियम की राशि जमा कराई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि फसल बीमा योजना किसानों के हित में नहीं है। कांग्रेस की ही रजनी पाटिल ने अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें बड़ा घोटाला हो रहा है और कई अस्पतालों के नाम इसमें सामने आए हैं। जद (एकी) के रामनाथ ठाकुर और उनकी ही पार्टी की कहकशां परवीन ने भी लोक महत्त्व के अलग अलग मुद्दे उठाए।

इसी दौरान कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि सभी टीवी चैनल गुुरुवार रात से ही केंद्रीय खेल मंत्री के आचरण के बारे में दिखा रहे हैं जो ओलंपिक खेलों के सिलसिले में ब्राजील गए हुए हैं। बाजवा ने व्यवस्था के प्रश्न के तहत यह मुद्दा उठाना चाहा लेकिन उपसभापति पीजे कुरियन ने इसके लिए अनुमति नहीं दी और कहा कि यह व्यवस्था का प्रश्न नहीं है और एक मंत्री के खिलाफ आरोप है। हालांकि कई सदस्यों ने बाजवा का समर्थन किया और कहा कि यह राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है। इस मुद्दे पर कुछ समय के लिए हुए हंगामे के दौरान सदस्यों ने गोयल को वापस बुलाए जाने की मांग की।

शून्यकाल में ही सपा के नरेश अग्रवाल ने विनियोग विधेयक (संख्यांक तीन), 2016 पर सदन में चर्चा नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते से यह रोज कार्यसूची में सूचीबद्ध होता है लेकिन इस पर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने इस पर चर्चा नहीं होने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका प्रतिवाद करते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अगर हमारा इरादा इस पर चर्चा का नहीं होता तो इसे कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं किया गया होता। हमने कहा था कि देर तक बैठकर इस पर सदस्य चर्चा करें। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार की कार्यसूची में यह विधेयक विचार एवं लौटाने के लिए सूचीबद्ध था। इसके अलावा शुक्रवार की कार्यसूची के अनुसार तीन और विधेयक पर विचार होना था। कार्यसूची के अनुसार शुक्रवार को गैर सरकारी कामकाज भी होना था। लेकिन सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से पहले ही 11 बजकर करीब 50 मिनट पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

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