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कोचिंग सेंटर की छत ढहने पर स्थानीय लोगों का आरोप, निर्माणाधीन कार्य में नियमों की अनदेखी

कोचिंग संचालक शंकर की लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद एक भी दिन के लिए कोचिंग सेंटर की छुट्टी नहीं की गई थी।

Author नई दिल्ली | Updated: January 26, 2020 5:42 AM
बताया जा रहा है कि कोचिंग सेंटर 50-60 गज की जमीन पर बना हुआ था।

भजनपुरा थाना क्षेत्र के सुभाष मोहल्ला में शंकर एजुकेशन कोचिंग सेंटर की छत ढहने के बाद इलाके में चारों ओर अफरा-तफरी फैल गई थी। छत ढहने की आवाज जैसे ही आसपास के लोगों ने सुनी तो अपने घरों से बाहर निकले। वे लोग भी घटनास्थल पर पहुंचे, जिनके बच्चे पढ़ने के लिए इस कोचिंग सेंटर में कुछ घंटे पहले ही आए थे। हर कोई अपने बच्चों की तलाश करता हुआ दिखा। छह साल के बच्चे फरहान की इस हादसे में मौत हो गई है। उनके पिता आरिफ सुल्तान ने बताया कि घटना की जानकारी उनके बेटी ने दी, जो कि आठवीं कक्षा में पढ़ती है। इरफान ने बताया कि जब तक उनके बेटे को मलबे से बाहर निकाला गया तब तक काफी देर हो चुकी थी। सुल्तान ने कहा कि उसने बच्चे के सुनहरे भविष्य के लिए कोचिंग में भेजा था, लेकिन कहां पता था कि एक दिन उनका बेटा हादसे में भेंट चढ़ जाएगा। वहीं, हादसे के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बचाव दल के कर्मचारियों के पहुंचने से पहले ही बचाव कार्य में जुट गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर कोचिंग सेंटर के ऊपरी मंजिल का निर्माण किया जा रहा था। इसके साथ ही सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जा रही थी।

कोचिंग संचालक शंकर की लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद एक भी दिन के लिए कोचिंग सेंटर की छुट्टी नहीं की गई थी। इसके साथ ही शनिवार शाम जब निर्माण कार्य चल रहा था। उस वक्त भी नीचे के पहली और दूसरी मंजिल पर 30 विद्यार्थी पढ़ रहे थे। उनके पड़ोसी हरीश ने बताया कि इन दिनों दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल के कार्यकर्ता इलाके में प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। जैसे ही इमारत की छत ढहने की जानकारी कार्यकर्ताओं को मिली।

राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी स्थानीय लोगों के साथ बचाव कार्य में जुट गए। उन्होंने बताया कि अगर समय रहते कुछ बच्चों को बाहर नहीं निकाला जाता तो घायलों की संख्या बढ़ सकती थी। दमकल विभाग के कर्मचारियों और अन्य बचाव दल के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत कर मलबा के नीचे से 13 लोगों को बाहर निकाला और पास के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने पांच को मृत घोषित कर दिया।

पड़ोसी की दीवारों में भी आई दरार

बताया जा रहा है कि कोचिंग सेंटर 50-60 गज की जमीन पर बना हुआ था। इस हादसे के बाद पड़ोसी के मकानों में भी दरारें आ गई हैं। यही कारण है कि आसपास के लोगों को अब यह डर सताने लगा है कि अगर जर्जर दीवारों को ध्वस्त नहीं किया गया तो दीवारें गिर सकती हैं और बड़ा हादसा हो सकता है। यही कारण है कि आसपास के लोग घटना के बाद से डरे सहमें हैं।

बोर्ड परीक्षा के कारण एक और मंजिल बनाने की सोची

पड़ोसी विक्रम सिंह ने बताया कि यह कोचिंग सेंटर बीती आठ-दस साल से चल रहा था। बोर्ड की परीक्षाएं होने वाली हैं। यही कारण है कि संचालक शंकर ने सोचा होगा कि एक और मंजिल बना ली जाए। परीक्षा के दौरान वे छात्र-छात्राएं भी कोचिंग लेने के लिए आते हैं, जो पहले खुद से परीक्षा की तैयारी करते हैं।

निर्भय कुमार पांडेय  

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