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रोहित वेमुला की मौत से आहत बहन ने कहा, आठ लाख तो क्या आठ करोड़ भी नहीं स्वीकार

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में खुदकुशी करने वाले दलित छात्र रोहित वेमुला के बहन नीलिमा ने आठ लाख रुपए की अनुग्रह राशि ठुकराते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय आठ करोड़ रुपए भी देगा तो भी हमें नहीं चाहिए।

Author हैदराबाद | January 24, 2016 1:52 AM
एचसीयू के प्रभारी कुलपति विपिन श्रीवास्तव कुछ मिनटों तक प्रदर्शन स्थल पर खड़े रहे वहीं छात्रों ने ‘वापस जाओ’ का नारा लगाते हुए उन्हें लौट जाने को कहा।

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में खुदकुशी करने वाले दलित छात्र रोहित वेमुला के बहन नीलिमा ने आठ लाख रुपए की अनुग्रह राशि ठुकराते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय आठ करोड़ रुपए भी देगा तो भी हमें नहीं चाहिए। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की आलोचना करते हुए कहा कि जवाब देने में उन्हें पांच दिन का समय क्यों लग गया। उधर आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने वेमुला की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को ‘अपमानजनक’ करार दिया।

विश्वविद्यालय ने रोहित के परिजनों को आठ लाख रुपए की अनुग्रह राशि की पेशकश की थी। इसे आत्महत्या करने वाले दलित छात्र रोहित के परिजनों ने अस्वीकार कर दिया और उसकी मौत पर राजग सरकार की प्रतिक्रिया में देरी पर उसकी आलोचना भी की। रोहित की मां राधिका, बहन नीलिमा और भाई राजू ने मांग की कि उसकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को इंसाफ के कठघरे में लाया जाए। ये तीनों विश्वविद्यालए आए थे। नीलिमा ने कहा, ‘आठ लाख रुपए तो क्या, यदि आप एचसीयू से, जहां उसकी मौत हुई, आठ करोड़ रुपए भी देंगे तो हमें नहीं चाहिएं।’

राधिका ने कहा ‘मैं जानना चाहती हूं कि उसकी मौत क्यों हुई। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाए, उसे दंडित क्यों किया गया। स्मृति ईरानी (केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री) …उन्होंने पांच दिन बाद (हमसे) बात की। इसमें पांच दिन क्यों लग गए। आप भी महिला हैं….आप भी मां हैं….इसमें (परिवार को फोन करने और मौत पर शोक प्रकट करने में) पांच दिन लगते हैं।’

उल्लेखनीय है कि 17 जनवरी को रोहित विश्वविद्यालय में छात्रावास के एक कमरे में फांसी के फंदे से झूलता मिला था। भावुक मोदी ने शुक्रवार को कहा था, ‘जब यह खबर मिलती है कि मेरे ही देश के जवान बेटे रोहित को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। मां भारती ने अपना लाल खो दिया। कारण और राजनीति अपनी जगह पर होंगे लेकिन सच्चाई यह है। मैं उसके परिवार की पीड़ा को समझ सकता हूं।’ इस क्रम में ही केंद्र ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय से निलंबन के बाद रोहित द्वारा आत्महत्या कर लेने की घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन का निर्णय किया था।

विद्यार्थियों के आंदोलन की अगुवा ज्वायंट एक्शन कमिटी (जेएसी) ने मोदी के बयान पर ‘असंतोष’ प्रकट करते हुए सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री अब अपने मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जेएसी ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शोक संदेश हासिल करना बहुत ही अपमानजनक है, जिन्होंने अपने शोक संदेश में रोहित वेमुला को भारत माता की संतान बताया। ज्वायंट एक्शन कमिटी फोर सोशल जस्टिस रोहित की मौत पर राजनीति की कठोरतम शब्दों में निन्दा करती है। उसने कहा, ‘रोहित वेमुला और अन्य सामाजिक बहिष्कृत लोग हमेशा से हिंदुत्व और मनुवादी राजनीति के विरुद्ध रहे हैं, जिसका भाजपा के मंत्री गर्व से समर्थन करते हैं।’

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा की अपील खारिज कर दी जिन्होंने उन्हें इंसाफ का आश्वासन देते हुए आंदोलन खत्म करने का आह्वान किया था। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम के मौके पर कहा, ‘मंत्रालय की तरफ से दो सदस्यों की एक तथ्यान्वेषी समिति ने मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट दी। रिपोर्ट के अनुसार कुछ खामियां थी। उस रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया। यह आयोग अपना काम करेगा और तीन महीने में रिपोर्ट देगा। इसके आधार पर मंत्रालय आवश्यक कदम उठाएगा।’ कुशवाहा से जब विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने और चार दलित छात्रों के खिलाफ केस वापस लेने की आंदोलनरत छात्रों की मांग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘इसमें विश्वविद्यालय गौर करेगा। मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है।’
* जानना चाहती हूं कि रोहित की मौत क्यों हुई। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाए, उसे दंडित क्यों किया गया : मां राधिका

* आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने वेमुला की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को ‘अपमानजनक’ करार दिया।

* स्मृति ईरानी, बंडारू दत्तात्रेय समेत सरकार के मंत्रियों ने जिस तरह आचरण किया है, उस पर कार्रवाई भी आवश्यक है : कांग्रेस

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