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एनडी तिवारी के बेटे की मौत के तीन दिन बाद पुलिस ने दर्ज किया मर्डर का केस, तकिया से दबाकर मारने का शक

मंगलवार को दक्षिणी दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित घर पर रोहित मृत पाए गए थे। आनन-फानन में उन्हें साकेत के मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत बता दिया था।

पिता के साथ बातचीत करते हुए रोहित शेखर तिवारी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः वीरेंद्र नेगी)

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर की रहस्यमयी मौत के तीन दिनों बाद इस मामले में हत्या का केस दर्ज हुआ है। शुक्रवार (19 अप्रैल, 2019) को दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। अब यह केस क्राइम ब्रांच को सौंपा जाएगा।

एम्स के डॉक्टरों के पैनल ने पाया कि रोहित की मौत गला दबाने से हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत की असल वजह एस्पीजिया है। रोहित की जान गला दबाए जाने और दम घुटने के चलते हुई। सूत्रों के हवाले से शक जताया गया कि तकिया से गला दबाकर रोहित को मौत के घाट उतारा गया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि रोहित की मौत के बाद से उनके परिवार वाले जांच अधिकारियों की नजर में हैं। दरअसल, घर के किसी भी व्यक्ति ने रोहित की रहस्यमयी मौत के बाद पुलिस में शिकायत नहीं दी। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को गड़बड़ी का शक है।

वहीं, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि मौत की वजह अप्राकृतिक थी। पुलिस ने इसके बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि, पुलिस ने शुरुआत में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई की थी।

इससे पहले, मां उज्जवला ने मीडिया से दावा किया था कि रोहित की मौत प्राकृतिक है। उन्हें इस बात में कोई शक नहीं है। बता दें कि मंगलवार को दक्षिणी दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित घर पर रोहित मृत पाए गए थे। आनन-फानन में उन्हें साकेत के मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत बता दिया था।

अस्पताल के बयान के अनुसार, “हमारे पास शाम चार बजकर 41 मिनट पर इमरजेंसी कॉल आई थी। शेखर को उसके बाद फौरन अस्पताल लाया गया, जहां पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।” बताया जाता है कि घटना के दौरान रोहित की पत्नी और बड़ा भाई घर पर ही था, जबकि मां अस्पताल गई हुई थीं।

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