Bihar News: 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा के चुनावों में आरजेडी की करारी हार के आठ महीने हो चुके हैं। इन चुनावों में आरजेडी की सीटें महज 25 ही रह गईं थी। इसके आठ महीने बाद बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी को जकड़े हुए संकट और गहरा गया है।

बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सत्तारूढ़ बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19000 से ज्यादा वोटों से हराया। वहीं आरजेडी की रेखा कुमारी गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं और उनकी जमानत राशि जब्त हो गई।

क्यों हुआ था बांकीपुर चुनाव?

बांकीपुर उपचुनाव तब जरूरी हो गया था जब पांच बार के विधायक नितिन नवीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर पदोन्नति और उसके बाद राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट खाली कर दी थी। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनावों में, रेखा बांकीपुर सीट पर दूसरे स्थान पर रही थीं।

महज दो हफ्ते पहले आरजेडी के राज्य प्रवक्ता और पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ये घटनाक्रम आरजेडी के भीतर अलग-अलग स्तरों पर पनप रही नाराजगी के बीच हुए हैं। बताया जा रहा है कि आरजेडी के कई वरिष्ठ नेताओं में पार्टी के मुख्य राज्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के प्रति असंतोष है। वह विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के करीबी माने जाते हैं।

आरजेडी के दो नेताओं ने जाहिर किया असंतोष

हाल के महीनों में आरजेडी के दो प्रमुख नेताओं ने पार्टी के मनमानी कामकाज के खिलाफ असहमति व्यक्त की है। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्यसभा सांसद संजय यादव के अत्यधिक प्रभाव को लेकर विधानसभा चुनावों से पहले अपने भाई तेजस्वी के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया था, वहीं मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने भी विरोध जाहिर किया है। उन्होंने पार्टी के अंदर चापलूसों और चुनिंदा नेताओं के प्रभुत्व के मुद्दे को लगातार उठाया है।

इसी पृष्ठभूमि में बिहार आरजेडी अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सभी राज्य इकाई समितियों को भंग कर दिया है। आरजेडी नेतृत्व ने पिछले साल की शुरुआत में पूर्व सांसद और प्रमुख ईबीसी नेता मंडल को राज्य पार्टी इकाई का प्रमुख बनाया था।

आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हालांकि समय-समय पर अपनी इकाइयों में फेरबदल या उन्हें भंग करना किसी भी राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन हालिया फैसले पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। पहली बात तो यह है कि विधानसभा में हमारी सीटों की संख्या 2020 में 75 से घटकर 2025 में 25 रह गई है यानी हम 2010 की स्थिति में वापस आ गए हैं, जब हमने सिर्फ 22 सीटें जीती थीं। इससे साफ पता चलता है कि मतदाताओं के बीच हमारी लोकप्रियता कम हो रही है।”

सुधार की जरूरत

आरजेडी के एक और नेता ने बताया कि भले ही पार्टी ने कभी बांकीपुर सीट नहीं जीती थी, लेकिन पहली बार चुनाव लड़कर जीतने वाले किशोर के मुकाबले तीसरे स्थान पर रहना और जमानत जब्त हो जाना, इस बात की ओर इशारा करता है कि सुधार की जरूरत है।

नेता ने कहा, “अगर पार्टी समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ नई कमेटियां बनाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाती है, तो यह बहुत अच्छा होगा। भाई वीरेंद्र ने चापलूसों के एक गुट के हावी होने को लेकर जो चिंताएं जताई हैं, उन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। हमारे नेता तेजस्वी को ज्यादा सुलभ होना चाहिए और जब पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत हो, तब उन्हें गायब नहीं होना चाहिए।”

नेता ने आगे यह भी कहा कि किशोर को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि नीतीश कुमार के बाद के युग में उनमें मौजूदा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरने की क्षमता है।

प्रशांत किशोर की लोकप्रियता में बढ़ोतरी

किशोर की लोकप्रियता में आई भारी बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण बीजेपी और आरजेडी दोनों के समर्थन आधार में आई दरार थी। जहां एक ओर ऊंची जातियों के बड़े हिस्से ने बीजेपी से किशोर की ओर अपना समर्थन बदल दिया, वहीं ओबीसी के बड़े वर्ग और यहां तक ​​कि आरजेडी के मुस्लिम-यादव समर्थक आधार ने भी जेएसपी प्रमुख का साथ दिया।

2025 के बिहार चुनावों में हार के बाद आरजेडी एक संरचनात्मक संकट के दौर में प्रवेश करती दिख रही थी। उसके पारंपरिक एमवाई पार्टी के आधार में आई भारी गिरावट और किशोर के एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने से पार्टी हिल गई है। वरिष्ठ नेताओं और यहां तक ​​कि प्रवक्ताओं के बीच चल रहे आंतरिक कलह के बीच, आरजेडी अपने सदस्यों के बीच एकता स्थापित करने या कोई प्रभावी प्रतिवाद प्रस्तुत करने में संघर्ष कर रही है।

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जनसुराज के संस्थापक और बांकीपुर से नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर के आरोपों पर भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी पलटवार किया है। प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि भरत तिवारी के परिवार ने सम्राट चौधरी सरकार ने परिवार को 50 लाख रुपये दिए हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…