कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट से जमानत मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए शनिवार को उन्होंने कहा कि उनके पास “छिपाने के लिए कुछ नहीं है”। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) सरकार के इशारे पर काम कर रहा है।

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, अधिवक्ता प्रतीक चड्ढा और अक्षत गुप्ता ने अदालत में वाड्रा की ओर से पैरवी की। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट से जुड़े मामले में अदालत में पेश होने के बाद वाड्रा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए ईडी पर निशाना साधा। वाड्रा ने कहा, “मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी सरकार द्वारा संचालित की जा रही है और वह सरकार के निर्देशों पर ही कार्रवाई करती रहेगी। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मैं हमेशा यहां रहूंगा और हर सवाल का जवाब दूंगा।”

उन्होंने खुद को निडर बताते हुए कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं और मामले में आगे भी सभी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे। बता दें कि शुक्रवार को रॉबर्ट वाड्रा राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे। अदालत ने पिछले महीने ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था और उन्हें समन जारी किया था।

यह घटनाक्रम एक दिन बाद सामने आया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने वाड्रा की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट में वाड्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कथित मूल अपराध 2008 से 2012 के बीच के हैं, जबकि कुछ धाराएं बाद में PMLA की अनुसूची में जोड़ी गईं।

वहीं, ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने मामले की अगली सुनवाई 18 मई के लिए तय की है।

बता दें कि मामला फरवरी 2008 के उस जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसमें स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने शिकोहपुर में करीब 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। रॉबर्ट वाड्रा पहले इस संस्था के निदेशक थे। बाद में यह जमीन 2012 में रियल एस्टेट कंपनी DLF को 58 करोड़ रुपये में बेची गई, जिससे इसकी कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई।

ईडी का आरोप है कि यह लेनदेन अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने की बड़ी साजिश का हिस्सा था। एजेंसी के अनुसार जमीन का म्यूटेशन तेजी से किया गया और विकास संबंधी अनुमति देकर उसकी बाजार कीमत बढ़ाई गई।

अदालत ने ईडी की इस दलील का भी संज्ञान लिया कि मामले में आगे की जांच जारी है। खासकर उन अन्य संस्थाओं की भूमिका को लेकर जिनके नाम प्राथमिकी में शामिल हैं। अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसी सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी ताकि मामले की व्यापक पड़ताल सुनिश्चित हो सके।