सड़क सुरक्षा से जुड़ी सरकारी पहलों के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में 11 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों में दी।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाएं हमेशा से एक गंभीर समस्या रही हैं। कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी केवल 2.3 प्रतिशत है, लेकिन इसके बावजूद देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में से 36 प्रतिशत से अधिक मौतें इन्हीं मार्गों पर होती हैं। ऐसे में यहां दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आना एक अहम बदलाव माना जा रहा है।

पिछले तीन वर्षों में पहली बार 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 1,34,307 दुर्घटनाएं हुईं और 57,482 लोगों की मौत हुई। यह संख्या वर्ष 2024 के मुकाबले 11 प्रतिशत से अधिक कम है। वर्ष 2024 में 1,50,958 दुर्घटनाओं में 64,772 लोगों की जान गई थी। वहीं, 2023 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,50,177 दुर्घटनाओं में 63,112 लोगों की मौत हुई थी।

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मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या घटने में पांच राज्यों की बड़ी भूमिका रही। ये राज्य हैं – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना। इन पांच राज्यों में 2024 की तुलना में 2025 में कुल 6,072 कम मौतें दर्ज की गईं। इसी वजह से पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल मौतों की संख्या 7,290 तक घट सकी।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई। यहां 2024 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 9,560 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में घटकर 6,973 रह गई। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान रहा, जहां मौतों की संख्या 4,644 से घटकर 2,882 हो गई, यानी 1,762 कम मौतें हुईं।

यह आंकड़े अभी अस्थायी (प्रोविजनल) हैं और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं। यह पोर्टल सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों को दर्ज करने, प्रबंधन करने और विश्लेषण के लिए एक केंद्रीय मंच है।

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हालांकि, कुछ राज्यों में 2024 की तुलना में 2025 में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या बढ़ी भी है। गुजरात में दुर्घटनाएं 3,519 से बढ़कर 3,944 हो गईं और मौतें 2,192 से बढ़कर 2,380 हो गईं। झारखंड में पिछले तीन वर्षों से लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। यहां दुर्घटनाएं 2,039 से बढ़कर 2,056 और मौतें 1,686 से बढ़कर 1,783 हो गईं। उत्तराखंड में भी दुर्घटनाएं 828 से बढ़कर 875 और मौतें 543 से बढ़कर 605 हो गईं। इसी तरह दिल्ली में दुर्घटनाओं की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई, जो 593 से बढ़कर 1,827 हो गई, जबकि मौतें 258 से बढ़कर 260 हो गईं।

दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर है। इसके बाद चीन का स्थान है, जहां भारत के मुकाबले केवल 36 प्रतिशत मौतें होती हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा भारत का लगभग 25 प्रतिशत है। भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 63.45 लाख किलोमीटर है। इसमें 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और 1.80 लाख किलोमीटर राज्य राजमार्ग शामिल हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने चार मुख्य आधारों पर एक बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई है। इनमें शिक्षा, सड़क और वाहनों की बेहतर इंजीनियरिंग, कानून का सख्त पालन और दुर्घटना के बाद त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सहायता शामिल है।