rld leader jayant choudhary gives tips to congress for beat bjp in rajasthan mp - अब बीजेपी को एमपी-राजस्थान में हराने के लिए आरएलडी ने कांग्रेस को दिए टिप्स - Jansatta
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अब बीजेपी को एमपी-राजस्थान में हराने के लिए आरएलडी ने कांग्रेस को दिए टिप्स

जयंत चौधरी ने कहा कि 'इसका कोई कारण नहीं है कि कांग्रेस राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय पार्टियों को अपने साथ ना लेकर चले, जहां कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। ऐसे में कांग्रेस को गठबंधन करना चाहिए।

जयंत चौधरी ने कांग्रेस को दिए एमपी और राजस्थान में जीत के टिप्स। (image source-Facebook)

कैराना उप-चुनाव में मिली जीत से उत्साहित रालोद ने अब एमपी-राजस्थान में भी भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को टिप्स दिए हैं। रालोद के नेता जयंत चौधरी ने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा है कि कांग्रेस देश की बड़ी पार्टी है, लेकिन यदि वह एमपी-राजस्थान में भी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरे तो उसके इसका फायदा मिलना तय है। बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में यदि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनता है तो कांग्रेस उसकी धुरी होगी। यही वजह है कि जयंत चौधरी ने कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लेने की बात कही है। जयंत चौधरी ने कहा कि ‘इसका कोई कारण नहीं है कि कांग्रेस राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय पार्टियों को अपने साथ ना लेकर चले, जहां कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। ऐसे में कांग्रेस को गठबंधन करना चाहिए। कई क्षेत्रीय पार्टियों के नेता कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, उन्हें सिर्फ उचित मंच पर उचित सम्मान चाहिए।’

बता दें कि कैराना उप-चुनाव में रालोद की प्रत्याशी तब्बसुम हसन ने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को बड़े अंतर से पराजित कर यह सीट भाजपा से कब्जा ली है। इस सीट पर पहले भाजपा के सांसद चौधरी हुकुम सिंह जीते थे, लेकिन उनके देहांत के बाद इस सीट पर फिर से उप-चुनाव कराया गया था। रालोद को अपने पारंपरिक मतदाता जाटों के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन भी मिला। इसके अलावा रालोद को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ आने का भी बड़ा फायदा मिला। पहले गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव और अब कैराना और नूरपुर में मिली जीत से गठबंधन के हौंसले बुलंद हैं। यही वजह है कि अब आगामी लोकसभा चुनावों में भी महागठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि सीटों के बंटवारे पर यहां पेंच फंस सकता है।

बसपा सुप्रीमो मायावती इस मुद्दे पर अपनी चिंता भी जाहिर कर चुकी हैं। मायावती ने कहा था कि यदि महागठबंधन में उन्हें उचित सीटें नहीं दी गईँ तो वह अकेले दम पर भी चुनावों में जा सकती हैं। अब ‘उचित मंच पर उचित सम्मान’ की बात जयंत चौधरी ने भी कही है। रालोद ने नेता ने यह भी कहा कि भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियों को अपने निजी हित छोड़ने होंगे। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि क्या देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस बैकसीट लेने के लिए तैयार होगी? कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की मानें तो ऐसा हो भी सकता है! मनीष तिवारी ने इसके लिए कर्नाटक का उदाहरण दिया है कि किस तरह कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त समर्थन देकर भाजपा को सत्ता से दूर रखने का सफल प्रयास किया।

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