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‘सम्पूर्ण क्रांति’ पर बीजेपी सांसद आपस में उलझे, राजद सांसद बोले- ज्यादा रसूख है तो नई ट्रेन चलवा लें

पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने भी संपूर्ण क्रांति के मार्ग और परिचालन विस्तार की योजना पर आपत्ति जताई है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 11, 2019 8:53 PM
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पाटलीपुत्र से सांसद रामकृपाल यादव ने रेलवे की योजना का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। (फाइल फोटो)

बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच चलने वाली संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस को लेकर बीजेपी के सांसद आपस में ही उलझ गए हैं। दरअसल, गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर इस ट्रेन का विस्तार झारखंड के मधुपुर तक कराने का अनुरोध किया था। बीजेपी सांसद की अर्जी पर जब रेलवे ने इसकी योजना बना ली तब बिहार के बीजेपी सांसदों की नींद टूटी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पाटलीपुत्र से सांसद रामकृपाल यादव ने रेलवे की योजना का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। इसके बाद उनके समर्थन में आठ सांसद उतर आए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने भी संपूर्ण क्रांति के मार्ग और परिचालन विस्तार की योजना पर आपत्ति जताई है।

बीजेपी के दूसरे राज्यसभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा ने भी इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि बिहार का हक छीनने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर झारखंड को जरूरत है तो अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए।

राजद सांसद मनोज झा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर निशिकांत दूबे जी का इतना रसूख है तो नई ट्रेन क्यों नहीं चलवा लेते? उन्होंने कहा कि संपूर्ण क्रांति पटना से ही पैक चलती है। ऐसे में सवाल ही नहीं उठता कि उसका विस्तार आगे तक किया जाय। झा ने रेलवे बोर्ड पर भी सवाल उठाया कि जब ट्रेन इतनी पैक है तो रेलवे ने उस प्रस्ताव पर सवाल क्यों नहीं उठाया?

प्रस्ताव का विरोध करने वालों में सांसद कौशलेंद्र कुमार, सीपी सिंह, चंदन सिंह भी शामिल हैं। बीजेपी सांसदों में ईस्ट-सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

रामकृपाल यादव ने लिखा है कि यह ट्रेन पिछले 16 साल से सही समय पर राजेंद्र नगर से नई दिल्ली के बीच चल रही है और इसकी ऑक्यूपेंसी 213 फीसदी है। जबकि रेलवे नियमों के मुताबिक 70 फीसदी से कम ऑक्यूपेंसी वाली ट्रेनों का कही परिचालन विस्तारित किया जा सकता है। नेताओं ने कहा कि संपूर्ण क्रांति के विस्तार को जनता के साथ धोखा देना होगा।

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