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गरीब सवर्णों को आरक्षण: राज्‍यसभा में झुनझुना लेकर पहुंचे RJD सांसद, मोदी सरकार पर बोला हमला

राजद सांसद ने कहा कि बड़ी मुश्किल से ये झुनझुना हासिल हुआ है। आमतौर पर ये बजता है। लेकिन इस दौर में ये झुनझुना सत्ता प्रतिष्ठान के पास है। अब यह सिर्फ हिलता है, बजता नहीं है।

Author Updated: January 9, 2019 6:17 PM
राज्‍यसभा में झुनझुना लेकर पहुंचे RJD सांसद। (Video Grab)

राज्यसभा में बुधवार (9 जनवरी) को सामान्य वर्ग को रोजगार एवं शिक्षा में आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही है। इस दौरान उस समय एक अजीबो-गरीब घटना देखने को मिली जब इस विधेयक का विरोध कर रही पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने  एक ‘‘झुनझुना’’ दिखाया। झा ने कहा यह झुनझुना फिलहाल सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के पास है। हिलता तो है,  लेकिन बजता नहीं है।

झा ने चर्चा के दौरान कहा, “124 वें संविधान संशोधन के विपक्ष में मैं बोलने को खड़ा हुआ हूं। सदन को भी बताना चाहता हूं और सड़क पर भी लोगों को बताना चाहता हूं कि हम विपक्ष में क्यों हैं? हम सामाजिक न्याय और बहुजन चिंतन वाले दल हैं। हमारे नेता जो आज कई प्रताड़नाओं से गुजर रहे हैं, इसकी पैरोकारी में सबसे आगे थे। बहुत सारी मंजिलें बांकि थी। एक छोटी मंजिल हासिल हुई थी। लेकिन लोग तब हमसे पूछते हैं कि आपका पोजिशन क्या है? हमारा पोजिशन है कि आप संविधान की मूल अवधारणाओं के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।”

राजद नेता ने कहा, “आर्टिकल 15 और आर्टिकल 16 जब बने थे, तो कई दिनों तक चर्चा हुई थी। आज हमने चंद घंटे में यह तय कर दिया कि इसकी आत्मा को मार दो। ऐसे नहीं होता है। हमें तो नीति और नियत दोनों पर एतराज है। मैं सीधे तौर पर कहता हूं कि आरक्षण खत्म कर देंगे, पहले जाति तो खत्म करो। एक-एक आर्टिकल पर बात होती थी। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में जब-जब किसी एक व्यक्ति के इर्दगिर्द तानाबाना बुना जाता है तो यह व्यवस्था लहुलूहान होती है।”

राजद सांसद नेे कहा, “हमारे एक साथी कहते हैं कि गरीबों की जाति नहीं होती। लेकिन सच्चाई ये है कि जातियों में गरीबी है। 100 लोगों का सर्वे कर लिजिए, 90 लोग ओबीसी, एससी, एसटी के मिलेंगे और तब मुसलमान। आरक्षण के बारे में कितनी दफा बात हुई है। आरक्षण आमदनी बढ़ाओ योजना नहीं है। संविधान सभा की बैठकों और बाबा साहब को पढ़ने की जरूरत है। हमने आरक्षण को मनरेगा की श्रेणी में ला दिया। आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है। जिनको गुरेज है आरक्षण से वे प्रतिनिधित्व देख लें।”

मनोज झा ने आगे कहा, “मंडल कमीशन जब आया तो दस्तावेज के साथ आया। जातियों के आंकड़े आए। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसकी सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी। ओबीसी को मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। संसद संकीर्ण दायरों में सोचने के लिए नहीं बनी है। जिस पेड़ में ही दोष है, उसकी के आधार पर आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण देने का निर्णय किया जा रहा है। यदि मैं विश्वविद्यालय की नौकरी में नहीं होता तो मैं भी इस दायरे में आ जाता क्योंकि मेरे पर 1000 स्क्वॉयर फीट से ज्यादा का मकान नहीं है। आज जो लोग चुप्पी साधे हुए हैं, वे जान लें कि ये जातिगत आरक्षण को समाप्त करने की दिशा में पहल शुरू हो गया है।”

राजद सांसद ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं प्रधानमंत्री जी के सामने बोलना चाहता था। लेकिन वे आए नहीं तो मैं क्या करू? आप कैसे पिछड़ेपन को तय कर रहे हो? इतनी समझ का अभाव कैसे हो सकता है? इसे तो पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। यह पूरी की पूरी सरकार वाट्सएप पर कर रही है। यदि इतना ही कर रहे हैं तो निजी क्षेत्र को हाथ लगाने से क्यों डर रहे हैं। निजी क्षेत्र कौन से निजी होता है? कोई निजी नहीं होता। उन्हें तमाम तरह की रियायतें दी जाती है। जातिगत जनगणना के आंकड़ों पर कुंडली मार क्यों बैठे हैं? क्या ओबीसी की आबादी 65 से 68 प्रतिशत है? क्या एससी-एसटी की आबादी ज्यादा है? आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की हमारी मांग फिर से शुरू हो जाएगी।”

इसके बाद अंत में उन्होंने कहा, “मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि बुरा न माना जाए, बड़ी मुश्किल से ये (झुनझुना दिखाते हुए) हासिल हुआ है। रंग भी मिलता जुलता है। इसे झुनझुना कहते हैं। आमतौर पर ये बजता है। लेकिन इस दौर में ये झुनझुना सत्ता प्रतिष्ठान के पास है। हिलता है, बजता नहीं है। हम एक मात्र दल हैं जो खुलेआम विरोध कर रहे हैं। हम कह रहे हैं कि आप (केंद्र सरकार) एंटी बैकवर्ड और एंटी दलित हो।”

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