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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लालू की चिंता- कहीं अखिलेश यादव की तरह मुलायम न बना दे बेटा तेजस्वी

बिहार की राजनीति में अभी से यह चर्चा गर्म है कि लालू अपनी गैरमौजूदगी में किसे पार्टी का मुखिया बनाएंगे।

Author May 14, 2017 10:50 AM
लालू यादव (बाएं) और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव। (Express Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला केस में सभी मामलों की अलग-अलग जांच करने के आदेश दिए, जिसके बाद लालू प्रसाद यादव चिंता में डूब गए। चूंकि यह मामले पांच अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं, ऐसे में लालू यादव को एक जगह से दूसरी जगह पर दौड़ना पड़ेगा। जब लालू 2013 में रांची जेल में रहे थे तब लालू को एक वीआईपी की तरह रखा गया था। लालू जेल में ही दरबार लगाते थे, उन्हें हर दिन घर का बना खाना मिलता था। दरअसल झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लालू के पांच विधायकों को समर्थन मिला हुआ था।

लेकिन अगर इस बार लालू को जेल होती है तो उन्हें जेल में पिछली बार की तरह सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इस समय झारखंड में एनडीए सरकार है, जिसके लालू धुर विरोधी रहे हैं। लालू को डर है कि कहीं तेजस्वी नितीश कुमार से प्रभावित ना हो जाएं या वह भी अखिलेश यादव की तरह ना कर बैठें। बेटा तेजस्वी यादव बिहार के उप मुख्यमंत्री के पद पर हैं, लेकिन लालू को डर है कि कहीं तेजस्वी भी नितीश कुमार से प्रभावित होकर अखिलेश यादव की तरह ना कर बैठें। बड़ा बेटा तेज प्रताप यादव को वैसे तो मंत्री पद दिया हुआ है लेकिन उन्हें राजनीति में उतना सक्रिय नहीं है।

इसके अलावा बेटी मीसा भारती एक सांसद हैं, जिन्हें पार्टी का मुखिया बनाया जा सकता है। हालांकि बिहार विधान परिषद में छह साल पूरे कर चुकी लालू की पत्नी राबड़ी देवी भी एक विकल्प हो सकती हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लालू यादव पर इस मामले में आपराधिक साजिश का केस चलाने की इजाजत दी है। कोर्ट ने 9 महीनों में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को भी मामले में देरी करने पर फटकार लगाई। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट को भी कानून के तय नियमों का पालन नहीं करने पर लताड़ लगाई।

(कूमी कपूर का लेख)

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