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कट्टरता पर बहस के बीच बोले रिजवान अहमद- भाजपा का समर्थन करने पर गाली देते हैं, बोल दूं ‘मोदी ने ये अच्छा काम किया’ तो इसी पर…

अगर कोई नबी की शान में गुस्ताखी करेगा तो जो आम मुसलमान है वो भी ये कहेगा कि इसकी सजा दो वो सजा अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होती है जैसे कहीं पर गर्दन काटना हो सकती है, कहीं पर कोड़े लगाना हो सकती है…

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रिज़वान अहमद (फोटो सोर्स: फेसबुक/rizwan ahmad)

पैगंबर को लेकर बीजपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के बाद देशभर में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की गई। अमरावती और उदयपुर की घटनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा का को जिम्मेदार ठहरा दिया था। इसी मुद्दे को लेकर न्यूज चैनल इंडिया टीवी पर बहस चल रही थी। वकील रिजवान अहमद ने मुसलमानों की कट्टरता के बारे में बताते हुए कहा कि अगर आप नबी की शान के खिलाफ कुछ भी बोलते हैं तो आम मुसलमान भी कहेगा कि इसको सजा मिलनी चाहिए।

रिजवान अहमद ने आगे बताया आप लोग जो रेडिक्लाइजेशन शब्द जो यूज करते हैं वो हमारी इस्लामिक थियोलॉजी में नहीं है। आप अंग्रेजी का कोई शब्द, संस्कृत डिक्शनरी का कोई शब्द बेचारे मासूम मुसलमानों पर थोप देते हो। आपके लिए जो रेडिक्लाइजेशन है वो हमारे लिए वे ऑफ लाइफ है। आप लोग हमेशा ये बोलते हो कि जिसने खंजर उठा लिया वो रेडिक्लाइज्ड हो गया। खंजर उठाने वाला रेडिक्लाइजेशन की इंतेहा तक पहुंच गया… ये बोलना चाहिए। लेकिन जो मां अपनी चौथी क्लास के बेटे से कहती है कि बेटा होली नहीं खेलना तो ये आपकी भाषा में रेडिक्लाइजेशन की शुरुआत है। लेकिन वो जो मुसलमान महिला है वो अपने बच्चे को रेडिक्लाइज्ड नहीं कर रही है वो अपने बच्चे को नसीहत दे रही है जो टेक्निकली इस्लामिक नजरिए से अच्छी मानी जाएगी।

सिर्फ बीजेपी या मोदी की तारीफ कर दो…
न्यूज चैनल इंडिया टीवी पर हो रही टीवी डिबेट के दौरान मुस्लिम समुदाय के कई प्रबुद्ध लोग बैठे थे। बहस के दौरान रिजवान अहमद ने कहा, “मदरसा भूल जाइए, कुरान शरीफ भूल जाइए,हुजूर की शान भूल जाइए, अगर मैं सिर्फ इतना कह दूं कि मोदी जी की ये नीति बहुत अच्छी है, तो बल भर गालियां देते हैं। हम लोगों के डीएनए में ही इन्टॉलरेंस आ गया है। मोदी की तारीफ करते ही गालियां देने लगते हैं और आरएसएस का आदमी कहने लगते हैं।”

अगर मुसलमान कट्टरता पर आ गया तो…
रिजवान ने कहा, सिचुएशन इतनी आसान नहीं है जितना सब लोग समझते हैं। उन्होंने उदयपुर हत्याकांड के संदर्भ में कहा, लोग कह रहे हैं कि आईएसआईएस के तार जुड़े हैं, पाकिस्तान के तार जुड़े हैं… नहीं एक आम मुसलमान के सिर पर अगर जुनून सवार हो गया, वो रेडिक्लाइज्ड हो गया, उसका सर फिर गया तो वो खंजर उठा सकता है।

नबी की शान के खिलाफ बोलने वालों सजा का प्रावधान है
आप बात करते हैं हुजूर की शान में गर्दन काटने वालों की बात करते हैं तो आपको बता दें कि अगर कोई नबी की शान में गुस्ताखी करेगा तो जो आम मुसलमान है वो भी ये कहेगा कि इसकी सजा दो वो सजा अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होती है जैसे कहीं पर गर्दन काटना हो सकती है, कहीं पर कोड़े लगाना हो सकती है, कहीं पर थूकना हो सकती है कहीं पर पत्थर मारना हो सकती है लेकिन सजा है। अगर किसी ने नबी की शान में गुस्ताखी कर दी है तो कोई नॉर्मल मुसलमान भी ये नहीं कह सकता है कि कर दी तो कर दी ये नहीं हो सकता है।

40 मुल्कों में जारी है ये कानून
अब आप इसे चाहे रेडिक्लाइजेशन मान या आपकी जो मर्जी हो मेरे हिसाब से तो ये नॉर्मल बात है किसी भी मुसलमान के लिए। ये जरूरी नहीं है कि हर रेडिक्लाइज्ड आदमी खंजर उठाने की सीमा तक पहुंच जाए। लेकिन क्या हुजूर के खिलाफ गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ सारे मुसलमान खंजर उठा लें तो मैं कहूंगा कि नहीं हालात इतने खराब नहीं है। अगर कोई हमारी डिबेट में बैठकर ये कहता है कि ये संभव नहीं हो तो उनको ये समझाओ कि ये 40 मुल्कों में कैसे है। या तो ये कहो कि इन 40 मुल्कों को इस्लाम ही नहीं पता है या तो वो गुमराह है या फिर वो भटके हुए हैं।

कुरान शरीफ की आयतों में लिखा है गर्दन ऐसे काटो, टखना ऐसे काटो…
अगर कोई कहता है कि ये गलत कानून है ऐसा नहीं होना चाहिए हुजूर की शान में गुस्ताखी करने वालों को सजा नहीं मिलनी चाहिए तो वो उन 40 देशों को चिट्ठी लिखकर कह दे कि ये कानून हटा लिए जाएं तो क्या कोई हटा सकता है? जिना पर गर्दन काटना है, चोरी पर हाथ काटना है कुरान शरीफ में आयतें हैं। बाकयदा लिखा है कि हाथ ऐसे काटो और टखना ऐसे काटो इसको कोई झुठला देगा अब आप कहते हैं हुजूर की शान में हाथ काटना नहीं लिखा है लेकिन चोरी करने में हाथ काटना लिखा है।

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