Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इस्कॉन को दी है। इस्कॉन इस योजना के तहत राज्य में बच्चों को शुद्ध, पौष्टिक और सात्विक भोजन उपलब्ध कराएगा। इसके तहत पहले से परोसे जा रहे अंडों को पूरी तरह से शाकाहारी और पौष्टिक विकल्पों से बदला गया है। अंडों को मिड-डे मील से हटाने के मुद्दे पर ही विवाद हो गया है। टीएमसी ने इसे बच्चों को मिलने वाले न्यूट्रीशन से वंचित किया जा रहा है।

चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक तौर पर काफी टकराव है, लेकिन शुभेंदु सरकार के इस फैसले के मुद्दे पर टीएमसी और बागी गुट एक सुर में आलोचना कर रहा है। बागी गुट के विधायक ऋतब्रत बनर्जी से लेकर ममता गुट के नेता कुणाल घोष और डेरेक ओ ब्रायन ने भी मिड डे मील में बदलाव पर सवाल उठाए हैं।

ऋतब्रत बनर्जी ने की फैसले की कड़ी निंदा

टीएमसी के बागी गुट के विधायक दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने शुभेंदु सरकार के फैसले पर कहा, “जब प्रोटीन की बात आती है, तो भोजन से अंडा हटाना सही नहीं है, क्योंकि यह प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। बंगाल में लोग परंपरागत रूप से मांसाहारी भोजन करते हैं। अगर इन्हें हटा दिया जाता है, तो केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा, जो बंगाल की खान-पान की परंपराओं के अनुरूप नहीं है। हम इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं।”

कुणाल घोष ने की पुनर्विचार की मांग

दूसरी ओर टीएमसी के ममता गुट के विधायक कुणाल घोष ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “वर्तमान में मिड-डे भोजन में अंडे दिए जाते हैं लेकिन अब सरकार की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि अंडे शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार मिड-डे मील भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने पर विचार कर रही है। यह एक अत्यंत सम्मानित संस्था है, लेकिन समस्या यह है कि बच्चों को भोजन कराना एक बड़ी चुनौती है।”

कुणाल घोष ने कहा, “अंडे उन खाद्य पदार्थों में से एक हैं जो बच्चों को बहुत पसंद होते हैं। ये न केवल उनके पोषण और स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं, बल्कि बच्चों को बहुत आकर्षित भी करते हैं। यदि इस्कॉन मिड-डे मील तैयार करता है, तो एक धार्मिक संस्था होने के नाते उन्हें भोजन पूरी तरह शाकाहारी रखना होगा। ऐसे में बच्चों का मेन्यू मांसाहारी से शाकाहारी हो जाएगा और अंडे पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे। इसलिए, हम सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं।”

टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा एक्स पर लिखा, “चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाने के तमाशे के बाद अब गुजरात जिमखाना का असली चेहरा सामने आ गया है। विरोधियों पर अंडे फेंके जाते हैं, लेकिन मिड-डे मील से अंडे हटाकर बच्चों को जरूरी पोषण से वंचित किया जा रहा है और बंगाल इसे पूरी तरह नकारता है।”

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लगे झटके के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ऊबर नहीं रही है। उसके एक के बाद एक पुराने वफादार नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। टीएमसी अब सिर्फ पार्टी में टूट को लेकर मीडिया की सुर्खियों में है, बल्कि उसके अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बड़ा बयान दिया है। पढ़िए पूरी खबर…