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..जब बाबू जगजीवन राम को ‘फेल’ करने को इंदिरा गांधी ने लिया था ऋषि कपूर की ‘बॉबी’ का सहारा, जानिए पूरा मामला

प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ‘इंडिया ऑफ्टर गांधी’ में लिखा है कि जनवरी 1977 में देश में इमरजेंसी लागू हुए 19 महीने हो चुके थे। इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी को अचानक ऑल इंडिया रेडियो पर लोकसभा चुनाव कराने का ऐलान कर दिया।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: April 30, 2020 6:08 PM
1973 में आई ‘बॉबी’ जबरदस्त हिट हुई थी। ‘बॉबी’ को यदि हिंदी फिल्मों की पहली टीनएज लव स्टोरी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। ‘बॉबी’ के रिलीज होने के बाद तब एक अफवाह यह भी फैली थी कि डिंपल, राज कपूर और नरगिस की बेटी हैं।

ऋषि कपूर हमारे बीच नहीं रहे। दो दिन में सिने जगत की दो दिग्गज हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कह दिया। बुधवार यानी 29 अप्रैल 2020 को आंखों से अदाकारी में माहिर और मकबूल इरफान खान नहीं रहे। गुरुवार सुबह (30 अप्रैल) 8 बजकर 45 मिनट पर ऋषि कपूर ने एचएन रिलायंस अस्पताल में अंतिम सांस ली। दोनों ही कैंसर से जूझ रहे थे। वेटरन अभिनेता ऋषि कपूर और इरफान दोनों ही अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते रहेंगे। ऋषि कपूर की जिंदगी के कई ऐसे रोचक किस्से हैं, जिन्हें बॉलीवुड के गलियारों में खूब सुना जा सकता है, लेकिन कुछ ऐसे भी अनछुए पहलू हैं, जिन्हें शायद ही किसी को पता हो।

1970 में रिलीज हुई मेरा नाम जोकर ऋषि कपूर की पहली फिल्म थी। उसमें उन्होंने 14 साल के एक लड़के का किरदार निभाया था, जो अपनी टीचर से प्रेम करने लगता है। उन्होंने 1973 में रिलीज फिल्म ‘बॉबी’ से बतौर अभिनेता अपने सिने करियर की शुरुआत की। ‘बॉबी’ उस दौर की इतनी हिट फिल्म थी, कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी अपने विपक्षियों को मात देने के लिए इस फिल्म का सहारा लेना पड़ा था।

शायद ही किसी को मालूम हो कि देश में इमरजेंसी लागू करने का फैसला लेने वाली इंदिरा गांधी ने बाबू जगजीवन की एक रैली में भीड़ न जुटे इसके लिए ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया अभिनीत ‘बॉबी’ की अप्रत्यक्ष तौर पर मदद ली थी। यह और बात है कि वे सफल नहीं हो पाईं थीं।

प्रसिद्ध इतिहासकार, अर्थशास्त्री और कॉलमनिस्ट रामचंद्र गुहा ने ‘इंडिया ऑफ्टर गांधी’ में लिखा है कि जनवरी 1977 में देश में इमरजेंसी (आपातकाल) लागू हुए 19 महीने हो चुके थे। इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी को अचानक ऑल इंडिया रेडियो पर लोकसभा चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। उनकी इस घोषणा के बाद कई विपक्षी पार्टियों ने एक साथ एक बैनर तले चुनाव लड़ने का फैसला किया।’

गुहा के मुताबिक, ‘23 जनवरी को जनता पार्टी का गठन हुआ। जनता पार्टी के गठन के 10 दिन बाद बाबू जगजीवन राम ने भी केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया। बाबू जगजीवन राम उस दौर में दलितों के सबसे बड़े नेता थे। उनका व्यापक जनाधार था। वे अपनी राजनीतिक कुशाग्रता के लिए भी प्रसिद्ध थे। उनका इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था।’

गुहा ने लिखा है, ‘कांग्रेस से इस्तीफा देकर जगजीवन राम ने ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ नाम की नई पार्टी बनाई। यह भी ऐलान किया कि ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ जनता पार्टी संग मिलकर चुनाव लड़ेगी। विपक्ष और मजबूत हो गया। ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां होने लगीं। बाबू जगजीवन राम ने दिल्ली में 6 मार्च को विशाल जनसभा को संबोधित करने का ऐलान किया। उनकी जनसभा को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने एक दिलचस्प चाल चली।’

गुहा लिखते हैं, ‘जगजीवन राम की जनसभा से भीड़ को दूर रखने के लिए कांग्रेस ने ठीक उसी वक्त (जो जनसभा का समय था) ‘बॉबी’ का दूरदर्शन पर प्रसारण कराने का ऐलान किया। 1977 में सिर्फ दूरदर्शन ही होता था। उसका नियंत्रण पूरी तरह से सरकार (इंदिरा गांधी) के हाथ में था।’

गुहा के मुताबिक, ‘आम दिनों में यदि ‘बॉबी’ टीवी पर प्रसारित हो रही होती तो दिल्ली की लगभग आधी आबादी टीवी के इर्द-गिर्द ही सिमटी रहती, लेकिन 6 मार्च को ऐसा नहीं हुआ। उस वक्त के एक समाचार पत्र ने अगदे दिन हेडलाइन दी कि बाबूजी ने बॉबी पर जीत हासिल की। करीब 10 हजार लोगों ने दिल्ली में बाबूजी और जयप्रकाश नारायण को सुना।’

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