रिनिकी भुइयां पासपोर्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में कांग्रेस नेता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां रखने के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मांगी है।
जस्टिस जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। खेड़ा ने कहा कि अगर उन्हें दर्ज मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिलती है तो गिरफ्तारी पूर्व जमानत का पूरा उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सुनवाई के विषय हैं और उन्हें गिरफ्तार कर अपमानित करना आवश्यक नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि उनके खिलाफ लगाई गई धाराओं में से कुछ जमानती हैं जबकि अन्य में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट की फर्जी और छेड़छाड़ की गई प्रतियां पेश की हैं। उन्होंने कहा कि खेड़ा फरार हैं और वीडियो जारी कर रहे हैं तथा मुख्यमंत्री की पत्नी की कई नागरिकताएं होने के सभी आरोप गलत हैं।
सिंघवी और SG मेहता के बीच तीखी बहस
वहीं, राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है।
मानहानि के आरोपों पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पूछताछ के लिए खेड़ा उपलब्ध हैं और फरार होने का कोई जोखिम नहीं है। ऐसे में मूल सवाल गिरफ्तारी की जरूरत का है। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी की आशंका केवल ‘संवैधानिक काउबॉय’ (असम के मुख्यमंत्री के बयानों) से उत्पन्न रोष के कारण दिखाई जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि मुद्दा यह है कि हिरासत में लेकर अपमानित करना क्यों आवश्यक है?
जांच अधिकारी आईओ द्वारा गैर-जमानती वारंट की मांग यह कहते हुए की गई है कि आरोपी फरार है, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है, राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है..कई सारी धाराएं जोड़ दी गईं। सिंघवी ने कहा कि करीब 50-70 पुलिसकर्मी निजामुद्दीन पहुंचे मानो किसी आतंकी को गिरफ्तार करना हो।
असम पुलिस की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि मामले में भारत के चुनावों में संभावित अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का पहलू भी सामने आ सकता है। पुलिस का कहना है कि इस एंगल की गहन जांच की जानी आवश्यक है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है जो आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।
असम पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह बिना किसी विशेषण के एक अभियोजक की तरह अपनी दलील रखेंगे और अदालत से शिकायत को ध्यान से देखने का अनुरोध किया। उन्होंने शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि एंटीगुआ को अक्सर भगोड़ों के ठिकाने के रूप में देखा जाता है और आरोप है कि पवन खेड़ा ने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां के पास वहां का पासपोर्ट है।
मेहता ने आगे कहा कि नागरिकता से जुड़े सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं और जो पासपोर्ट की प्रतियां पेश की गईं। वे फर्जी, छेड़छाड़ की गई और मनगढ़ंत दस्तावेज हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 एक गैर-जमानती अपराध है और पासपोर्ट इस कानून के तहत ‘मूल्यवान दस्तावेज’ की श्रेणी में आता है।
उन्होंने अदालत को बताया कि चुनावी माहौल में एक व्यक्ति सामने आकर यह आरोप लगाता है कि एक महिला के पास तीन पासपोर्ट हैं और वह कथित दस्तावेजों को उसकी तस्वीर के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाता है, जबकि संबंधित महिला का कहना है कि उसने कभी ऐसे पासपोर्ट के लिए आवेदन ही नहीं किया और ये दस्तावेज उसके नहीं हैं।
मेहता के अनुसार, जांच में यह सामने आया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए दस्तावेज जाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूएई में जिन संपत्तियों का जिक्र किया गया। उनके बारे में भी शिकायतकर्ता का कहना है कि वे फर्जी दस्तावेजों पर आधारित हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि अगर ये दस्तावेज नकली हैं तो इन्हें किसने तैयार किया किसने इसमें मदद की और इस कथित साजिश में कौन-कौन शामिल है।
मेहता ने सवाल उठाया कि पासपोर्ट की मुहर किसने बनाई, सरकारी आधिकारिक सील किसने तैयार की और किस तरह एक व्यक्ति की तस्वीर हटाकर दूसरी तस्वीर लगाई गई? उन्होंने कहा कि क्यूआर कोड और अन्य आधिकारिक निशानों के साथ भी छेड़छाड़ की गई है और यह जांच आगे और भी फर्जी दस्तावेजों का खुलासा कर सकती है।
गुवाहटी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती
खेड़ा ने 24 अप्रैल के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए थे। इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया। शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा था।
सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को गिरफ्तारी की स्पष्ट आशंका है। उन्होंने हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इनसे अभियोजन की मंशा पर सवाल उठते हैं।
पवन खेड़ा के खिलाफ आरोप
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया। यह मामला उनके उस बयान के बाद दर्ज हुआ जिसमें उन्होंने दावा किया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।
7 अप्रैल को असम पुलिस पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची लेकिन कांग्रेस नेता वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद खेड़ा ने पारगमन अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 10 अप्रैल को हाई कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम राहत देते हुए असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी।
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52 साल की रिनिकी भुइयां शर्मा अब तक राजनीति से दूर रही हैं और उन्हें असम में एक कारोबारी महिला के तौर पर जाना जाता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनीं हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां की संपत्ति आखिर है कितनी? आपको बताते हैं उनकी नेटवर्थ, इनकम, प्रॉपर्टी और निवेश के बारे में…
