असम विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब विपक्षी गठबंधन में दरार दिखने लगी है। गठबंधन सहयोगी रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पास भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए कोई काउंटर प्लान नहीं। उन्होंने कांग्रेस पर “अव्यवस्थित” और “आधे-अधूरे” ढंग से चुनाव अभियान चलाने का भी आरोप लगाया।

अखिल गोगोई हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के उन 21 उम्मीदवारों में से एक हैं, जिन्हें जीत मिली। उनकी पार्टी रायजोर दल ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से दो पर जीत हासिल हुई। वहीं कांग्रेस ने 100 सीटों पर चुनाव लड़कर 19 सीटें जीतीं। जबकि अन्य सहयोगी दल असम जातीय परिषद, ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) एक भी सीट नहीं जीत सके। दूसरी ओर NDA ने 126 में से 102 सीटों पर कब्जा जमाया।

आधे-अधूरे मन से चुनाव प्रचार किया

बता दें कि कांग्रेस और रायजोर दल के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद चुनाव से सिर्फ 20 दिन पहले गठबंधन तय हुआ था। सिबसागर सीट से दोबारा विधायक चुने गए अखिल गोगोई ने हार के कारणों पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि भाजपा के पास बेहद मजबूत रणनीति थी, जबकि विपक्ष की ओर से आखिरी समय में बिना तैयारी और आधे-अधूरे मन से चुनाव प्रचार किया गया।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने पांच-छह स्तरों पर रणनीति बनाई थी, लेकिन हम कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाए क्योंकि हमारा ज्यादातर समय गठबंधन को अंतिम रूप देने में ही निकल गया।”

अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा ने परिसीमन और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) का इस्तेमाल अपने पक्ष में किया। उन्होंने कहा, “परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या घटाकर 22 कर दी गई और बाकी सीटों को हिंदू बहुल बनाया गया। पांच साल तक भाजपा ने हिंदू-मुस्लिम राजनीति की, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, ‘बांग्लादेशी’ और ‘मियां’ जैसे मुद्दे उठाए, लेकिन हमारे पास इसका जवाब देने की कोई रणनीति नहीं थी।” उन्होंने भाजपा की अन्य रणनीतियों में विकास की राजनीति, लाभार्थी योजनाएं, राष्ट्रवाद और मीडिया को अपने पक्ष में करने का जिक्र भी किया।

विपक्ष की कोई ठोस रणनीति नहीं थी

अखिल गोगोई ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष की कोई ठोस रणनीति नहीं थी। उन्होंने पूर्व नेता प्रतिपक्ष देब्रत सैकिया का नाम लेते हुए कहा, “वह विधानसभा में चुप बैठे रहते थे। कांग्रेस के पास 29 विधायक थे, लेकिन मैं अकेला होकर भी आवाज उठा रहा था। सिबसागर में लोगों का सबसे बड़ा मुद्दा यही था कि उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो विधानसभा में उनकी आवाज बने।”

उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने असम में पर्याप्त समय तक प्रचार नहीं किया। उनके मुताबिक, भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह लगातार राज्य का दौरा करते रहे, जबकि कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी सीमित रही।

अखिल गोगोई के इन बयानों पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। देब्रत सैकिया ने कहा कि अखिल गोगोई कांग्रेस के समर्थन के दम पर ही सिबसागर से जीत पाए हैं। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस वहां उम्मीदवार उतारती तो ईवीएस भी उन्हें नहीं बचा पाती।”

वहीं असम महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने भी अखिल गोगोई पर हमला बोलते हुए कहा, “क्या आपने अकेले ही गठबंधन तोड़ दिया? अगर कांग्रेस सिबसागर में उम्मीदवार उतारती, तो आपकी जीत मुश्किल हो जाती।”

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