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हर महीने चार लाख का गुजारा भत्ता देना होगा अरबपति को, पत्नी ने लगाई थी अदालत से गुहार

इसमें हर साल 15 फीसद की बढ़ोतरी की जाएगी।

Author नई दिल्ली | August 28, 2017 3:39 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सुनने में यह अजीब लग सकता है। लेकिन दिल्ली की एक अदालत ने एक अरबपति शख्स को निर्देश दिया है कि वह अपनी परित्यक्त पत्नी को हर महीने चार लाख रुपए बतौर गुजारा भत्ता दे। इसमें हर साल 15 फीसद की बढ़ोतरी की जाएगी। कारोबारी ने अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी को छोड़ दिया था।
अदालत ने गुजारा भत्ता तय करते समय इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस कारोबारी का नाम फार्च्यून पत्रिका की ‘सुपर रिच’ (बेहद अमीर) श्रेणी में आता है। इस शख्स का कारोबार करीब 1,000 करोड़ रुपए सालाना है। प्रमुख जज नरोत्तम कौशल ने इसके साथ ही गुजारे भत्ते में प्रतिवर्ष 15 फीसद की बढ़ोतरी करने का भी निर्देश दिया और कहा कि पति की आय में पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान ‘महत्त्वपूर्ण उछाल’ आया है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
न्यायाधीश ने कहा, ‘परिवार के कारोबार की ‘सुपर रिच लिस्ट’ में जगह और फार्च्यून 500 में उनकी कंपनियों का मूल्य 921 करोड़ रुपए दर्शाया जाना इस बात का संकेत है कि पति भारत के एक बेहद प्रभावशाली कारोबारी परिवार से आता है।’ और वह एक मात्र बेटा है जो अपने पिता के साथ रह रहा है। अपने वकील मानव गुप्ता के जरिए दायर याचिका में महिला ने आरोप लगाया था कि मार्च 2008 में उसे ससुराल से बाहर निकाल दिया गया जिसके बाद उसने अदालत में गुजारे भत्ते के लिए याचिका दायर की।

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हालांकि, याचिका की लंबित अवधि के दौरान पति ने जनवरी 2011 में पत्नी से अलग होने के लिए याचिका दायर कर दी। महिला ने चार अगस्त 2011 को गुजारे भत्ते के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। आठ फरवरी 2013 को एक अदालत ने उन्हें प्रति माह 1.25 लाख रुपए का गुजारा भत्ता तया किया।
2012-13 में सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि वर्ष 2011-12 में पति की आय में दोगुनी आय की तुलना में अधिक मात्रा में बढ़ोतरी हुई। न्यायाधीश ने कहा, ‘आवेदक (महिला) को पति की इस बढ़ी हुई आय के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।’ पांच मार्च 2013 को दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही के दौरान महिला को प्रति माह 75,000 रुपए का गुजारा भत्ता मुकर्रर किया था। दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। शीर्ष अदालत ने अप्रैल 2014 में मामले को वापस अदालत को लौटा दिया। इसके बाद महिला ने हाई कोर्ट से पहले याचिका वापस ले ली थी।
उसके बाद, महिला ने गुजारा भत्ता के लिए परिवारिक अदालत में दायर याचिका की। सात लाख रुपए प्रति महीने गुजारे भत्ते की मांग करते हुए महिला के वकील ने कहा था कि पति का 921.28 करोड़ रुपए मूल्य का कारोबार है। उनका घर पांच सितारा होटल के बराबर है। हालांकि पति ने दावा किया था कि वे विभिन्न कंपनियों के निदेशक थे, लेकिन केवल एक फर्म से 90,000 रुपए का मासिक वेतन अर्जित किया।

 

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