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सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर ने कहा- अस्थाना को लाने के लिए मोदी सरकार ने मुझे हटाया था

पिछले साल अक्‍टूबर में रिटायर होने वाले रूपक दत्‍ता अब कर्नाटक मानवाधिकार आयोग से जुड़े हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि वह सीबीआई में जारी अंदरूनी कलह से हैरान नहीं हैं।

गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्‍थाना। (File Photo : PTI)

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रूपक दत्‍ता दो साल पहले सीबीआई निदेशक बनने की कतार में थे। रिटायर होने के बाद, अब उन्‍होंने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने गुजरात कैडर के राकेश अस्‍थाना के लिए उन्‍हें किनारे कर दिया। अस्‍थाना अब भ्रष्‍टाचार के आरोपी हैं और सीबीआई उनके खिलाफ जांच कर रही है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्‍थाना को 24 अक्‍टूबर से कार्यमुक्‍त कर दिया गया था। दत्‍ता ने द टेलीग्राफ अखबार से बातचीत में कहा कि उन्‍हें ‘विश्‍वास है कि अस्‍थाना की जगह बनाने के दिसंबर, 2016 में उनका ट्रांसफर गृह मंत्रालय कर दिया गया।’ तब दत्‍ता सीबीआई के विशेष निदेशक थे।

पिछले साल अक्‍टूबर में रिटायर होने वाले दत्‍ता अब कर्नाटक मानवाधिकार आयोग से जुड़े हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि वह सीबीआई में जारी अंदरूनी कलह से हैरान नहीं हैं। दत्‍ता के अनुसार, सरकार अपने वफादारों को उच्‍च पदों पर बिठाने के लिए ”जोड़-तोड़” करती रही है। अचानक ट्रांसफर के बाद पहली बार दत्‍ता ने पहली बार अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। उन्‍होंने अखबार से कहा, ”जो हम देख रहे हैं, वह भगवान की करनी है, सरकार की जोड़-तोड़ का नतीजा है।”

दिसंबर, 2016 में तत्‍कालीन सीबीआई निदेशक अनिल सिन्‍हा के रिटायर होने के तीन पहले, आश्‍चर्यजनक ढंग से दत्‍ता का ट्रांसफर कर दिया गया था। अपनी वरिष्‍ठता के चलते दत्‍ता सीबीआई निदेशक बनने की रेस में सबसे आगे थे। उनके जाने के बाद, तब एडिशनल डायरेक्‍टर रहे अस्‍थाना एजंसी के सबसे वरिष्‍ठ अधिकारी बन गए थे।

1981 बैच के आईपीएस अधिकारी दत्‍ता ने कहा, ”सरकार पहले ही तय कर चुकी थी कि एजंसी की कमान अस्‍थाना को देनी है। इसलिए उसने मुझे हटाया और 2 दिसंबर को (जिस दिन सिन्‍हा रिटायर हुए) उन्‍हें (अस्‍थाना) अंतरिम निदेशक बना दिया। इस विचार के साथ कि कुछ समय बाद उन्‍हें पूर्ण-कालीन निदेशक नियुक्‍त कर दिया जाएगा।”

दत्‍ता ने सीवीसी की स्‍वतंत्रता पर भी सवाल खड़े किए। अखबार के अनुसार उन्‍होंने कहा, ”आश्‍चर्यजनक रूप से, सीवीसी मूकदर्शक बने रहे और मुझे अचानक हटाए जाने के खिलाफ कुछ नहीं कहा। यह बहस का विषय है कि सीवीसी कितने स्‍वतंत्र हैं।” दत्‍ता के अनुसार, वर्मा और अस्‍थाना के बीच हुए झगड़े से सीबीआई की साख रसातल में पहुंच गई है।” दत्‍ता ने यह भी कहा कि सीबीआई में परेशानियां तब शुरू हुईं ”जब अस्‍थाना एक निदेशक की तरह काम करने लगे।”

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