केंद्र सरकार के साथ बातचीत में गतिरोध कारण सोमवार को लद्दाख में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। राजनीतिक नेताओं के बंद के आह्वान पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने आज अपने चार-सूत्री एजेंडे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करना, छठी अनुसूची में शामिल करना, नौकरियां और सांस्कृतिक सुरक्षा शामिल हैं।

लद्दाख के दो संगठनों- एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने लेह और कारगिल में बंद बुलाया। ये दोनों संगठन केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने वाली एक समिति का हिस्सा हैं।

लोग राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वे बैनर लेकर बाजारों में मार्च कर रहे थे, जिससे लेह और कारगिल में बाजार बंद रहे। ज़ांस्कर के दूर-दराज के इलाकों के लोगों ने भी इस हड़ताल में हिस्सा लिया।

यह पिछले साल सितंबर के बाद पहला बड़ा विरोध-प्रर्दशन है। 24 सितंबर को पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी। उस समय पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। केंद्र सरकार ने उनका केस वापस ले लिया है और उन्हें शनिवार को जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया है।

एचपीसी के सदस्य और एबीएल के सह अध्यक्ष चेरिंग दोरजय लकरूक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बहुत सारे लोग विरोध में शामिल हुए, लेकिन प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई जगह बैरिकेड लगाए थे, फिर भी उन्होंने लोगों से शांत रहने को कहा और सभी ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने यह भी कहा कि इस विरोध का मकसद नई दिल्ली को यह संदेश देना है कि लोग अपने अधिकारों की मांग करना नहीं छोड़ेंगे, हम अपने हक की मांग करना बंद नहीं करेंगे।

लद्दाख राज्य गृह मंत्रालय के साथ चार सूत्री एजेंडा पर बातचीत कर रहा है। इसमें लद्दाख को राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, लद्दाख के युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण और क्षेत्र के दोनों हिस्सों के लिए अलग-अलग संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का गठन शामिल है।

इस क्षेत्र में स्थित दो स्वायत्त पहाड़ी परिषदों में से, लेह स्थित परिषद का पांच वर्षीय कार्यकाल 1 नवंबर, 2025 को समाप्त हो गया और परिषद के नए चुनावों की घोषणा अभी तक नहीं की गई है। चूंकि लद्दाख को पूर्व जम्मू और कश्मीर राज्य से अलग करके एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, जिसमें कोई विधायिका नहीं है, इसलिए इस क्षेत्र से एक सांसद को छोड़कर, लोगों के लिए पर्याप्त लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के अभाव को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। कारगिल स्थित पहाड़ी परिषद वर्तमान में अपने कार्यकाल के तीसरे वर्ष में है।

लैक्रूक ने कहा कि प्रतिनिधित्व में इस कमी ने एक खालीपन पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों को समझ नहीं आ रहा कि वे किससे मदद मांगें। केडीए सदस्य सज्जाद कारगिली ने कहा कि अगर लद्दाख के लोगों की मांगें पूरी नहीं की गईं, तो “हमारे पास अपने आंदोलन को जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”

एचपीसी के भीतर संवाद को बाधित करने के लिए गृह मंत्रालय को दोषी ठहराते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय “हम पर बिना परामर्श के थोपा गया था और इसलिए वर्तमान अशांति केंद्र की अपनी नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।” इन विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने वाले लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान भी सोमवार को कारगिल में आयोजित रैली में शामिल हुए।

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद पत्नी गीतांजलि का पहला रिएक्शन

क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था। रिहाई के एक दिन बाद वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. अंगमो ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने जेल में महीनों तक सीमित मुलाकातों के बाद हुई अपनी पहली सुकून भरी बातचीत का जिक्र किया। पढ़ें पूरी खबर।