Jammu-Kashmir News: नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ महीनों से चल रहे मतभेदों के बाद पार्टी के श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा मांगने के मामले में पार्टी का रुख अब भारतीय जनता पार्टी के रुख से अलग नहीं है।
पार्टी अध्यक्ष को लिखे अपने पहले सीधे पत्र में रुहुल्लाह ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखा और उसे सोशल मीडिया के जरिये शेयर किया। 25 अगस्त को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा था, “कब तक गुलाम बने रहोगे? कभी न कभी तो तुम्हें अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा। कब खड़े होगे?”
वे शब्द मेरे दिल को गहराई से छू गए- रुहुल्लाह
इस बयान का जिक्र करते हुए रुहुल्लाह ने कहा, “मुझे यह स्वीकार करना होगा कि वे शब्द मेरे दिल को गहराई से छू गए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हममें से कई लोगों की उस निराशा को व्यक्त किया है कि जो हमारा हक है, उसे मांगते समय भी हमसे बीजेपी के सामने गिड़गिड़ाने की उम्मीद की जाती है। तो क्या मैं पूरी विनम्रता के साथ पूछ सकता हूं, जब मैं वही सवाल पूछता हूं तो आपको आपत्ति क्यों होती है?”
केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने की पार्टी की बार-बार की मांगों पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि राज्य का दर्जा स्वीकार करके वे अगस्त 2019 के संवैधानिक हमले को वैधता और सामान्यीकरण दे रहे हैं, साथ ही यह संकेत भी दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर के लिए बीजेपी का राजनीतिक समझौता हमें स्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा, “ऐसा करके हम उन संवैधानिक सुरक्षाओं को भी खोने का जोखिम उठा रहे हैं जो हमारी अनूठी भू-राजनीतिक स्थिति, संस्कृति, परंपराओं और नाजुक पर्यावरण को देखते हुए हमारे लोगों के लिए अपरिहार्य हैं।”
रुहुल्लाह पिछले एक साल से राज्य का दर्जा देने और अनुच्छेद 370 पर अपनी पार्टी के रुख की आलोचना करते आ रहे हैं। 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रमुख प्रचारक रुहुल्लाह लगातार स्वतंत्र राजनीतिक रुख अपना रहे हैं, दिसंबर 2024 में, विधानसभा चुनाव के ठीक दो महीने बाद, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आरक्षण के युक्तिकरण की मांग को लेकर छात्रों के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था।
राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर पार्टी के रुख के बारे में लिखे अपने पत्र में रुहुल्लाह ने कहा कि अगर 2024 के चुनाव घोषणापत्र का मसौदा तैयार करते समय बीजेपी सत्ता में नहीं होती तो यह एक उचित तर्क होता। रुहुल्लाह उस समिति में भी शामिल थे जिसने यह दस्तावेज लिखा था।
उन्होंने शुक्रवार को अपने पत्र में कहा, “तो फिर हमने अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली को क्यों शामिल किया? क्या हम ऐसे वादे कर रहे थे जिन्हें हम जानते थे कि हम पूरा नहीं कर सकते या शायद वास्तव में कभी पूरा करने का इरादा ही नहीं रखते थे? क्या हमने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के लोगों पर हुए घावों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए किया और फिर सरकार बनने के बाद अपने वादों को आसानी से भुला दिया।”
निश्चिंत रहें इस्तीफा जरूर आएगा- रुहुल्लाह
इस्तीफे को लेकर उठ रही चिंताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए काफी अपमानजनक हमला किया। रुहुल्लाह ने कहा, “निश्चिंत रहें, इस्तीफा जरूर आएगा। यह आपके मांगे बिना भी आ जाता, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि सांसद 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सांसदों के सम्मेलन से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद नवंबर में इस्तीफा दे सकते हैं। यह पत्र नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से रुहुल्लाह को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने के कुछ दिनों बाद आया है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के बिना नया जनादेश मांगें, क्योंकि रुहुल्लाह और उनके बेटे, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।
वरिष्ठ अब्दुल्ला ने कहा था, “क्या रुहुल्लाह साहब नेशनल कॉन्फ्रेंस के बिना कभी चुनाव जीत सकते थे? मैं उनसे कहता हूं, इस्तीफा दे दीजिए, संसद से इस्तीफा दे दीजिए और जनता के पास लौट जाइए। हम देखेंगे कि कौन उन्हें वोट देता है। सब कुछ आपके सामने आएगा।”
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जम्मू कश्मीर में दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हुई हत्या के मामले ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और आतंकवाद के मुद्दे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुद्दे पर अब केंद्रशासित प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी टिप्पणी की और पूछा क्या सच में आतंकवाद खत्म हो गया है? यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
