ताज़ा खबर
 

विरोध प्रदर्शनों में जान-माल के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- भरपाई के लिए तय की जाए जिम्मेदारी

पीठ ने कहा कि यद्यपि 2009 में शीर्ष अदालत ने दिशा निर्देश बनाए हैं जिनमे ऐसे आन्दोलनों की वीडियोग्राफी करना भी शामिल है परंतु इससे पीड़ित व्यक्तियों को नुकसान की भरपाई कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

Author नई दिल्ली | Published on: November 28, 2017 8:08 PM
उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र से यह जानकारी एक याचिका पर सुनाई के दौरान मांगी है।

आन्दोलनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को होने वाले नुकसान और लोगों की जान जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केन्द्र से कहा कि इस तरह की गुण्डागर्दी की जिम्मेदारी निर्धारित करने और ऐसे हिंसक प्रदर्शनों के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में अदालतों का सृजन किया जाए। अटार्नी जनरल ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग में हुए आन्दोलन का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय जनता के लिए इससे काफी मुश्किल हो गई थी क्योंकि खाद्य सामग्री और पेट्रोल की आपूर्ति बाधित हो गई थी तथा केन्द्र को ट्रकों को कलिंपोंग में प्रवेश दिलवाने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की दस कंपनियां भेजनी पड़ी थीं।

वकील विल्स मैथ्यू ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उसे याचिकाकर्ता कोशी जैकब को उनकी परेशानियों के लिए कुछ न कुछ मुआवजा देने का निर्देश देना चाहिए। शीर्ष अदालत ने केन्द्र को सुझाव दिया कि संबंधित उच्च न्यायालयों से परामर्श करके एक या इससे अधिक जिला न्यायाधीशों को ऐसे तत्वों पर मुकदमा चलाने और ऐसी अराजकता के लिए जिम्मेदार लोगों के दीवानी दायित्व तय करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने ऐसे संगठनों अथवा राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की हिमायत की है जिनके सदस्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने में लिप्त होते हैं।

पीठ ने कहा कि यद्यपि 2009 में शीर्ष अदालत ने दिशा निर्देश बनाए हैं जिनमे ऐसे आन्दोलनों की वीडियोग्राफी करना भी शामिल है परंतु इससे पीड़ित व्यक्तियों को नुकसान की भरपाई कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘ये आन्दोलन, जिनकी परिणति जान माल के नुकसान में होती है, अक्सर होते रहते हैं। यदि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय को इनसे निबटना होगा तो यह बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए कोई अन्य मंच होना चाहिए जिसके पास जाकर लोग कानूने के अनुसार राहत प्राप्त कर सकें।’’

पीठ ने यह आदेश वकील कोशी जैकब की याचिका पर दिया जिसमें ऐसे आन्दोलनों के दौरान प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में न्यायलाय के दिशा निर्देशों पर अमल करने और उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। न्यायालय ने कहा कि यद्यपि संविधान ने लोगों को स्वतंत्र रूप से एकत्र होने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार प्रदान किया है परंतु किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या हिंसा में संलिप्त होने का अधिकार नहीं दिया गया है जिसमें लोग अपनी जान गंवा दें।

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इस सुझाव से सहमति व्यक्त की और कहा कि सरकार ने विधि एवं न्याय मंत्रालय के परामर्श से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने के कानून में संशोधन के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विधेयक का मसौदा तैयार हो गया है और इसे गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया गया है। इसमें जनता और इसमें दिलचस्पी रखने वाले लोगों के विचार आमंत्रित किए गए हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 इवांका ट्रम्प बोलीं- चाय बेचकर प्रधानमंत्री बनना नरेंद्र मोदी की बड़ी उपलब्धि, भारत में बदलाव की बयार
2 कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी पर लगाया नीचे गिरने का आरोप, कहा- पिछड़ी जाति में जन्म लेने का जातीय कार्ड खेल रहे हैं पीएम
3 वीड‍ियो: ऐसे होती है पीएम की लैड‍िंग, व‍िमान लैंड होते ही हर ओर से आ जाते हैं एसपीजी कमांडो
ये पढ़ा क्या?
X