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सर्वे: नरेंद्र मोदी को केजरीवाल ने पछाड़ा, 42% ने सीएम को तो 32% ने पीएम को किया पसंद, दिल्ली के 53% आप सरकार के काम से खुश!

लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे में जब मतदाताओं को चुनने के लिए कहा गया, तो 42% ने केजरीवाल को मोदी के ऊपर चुना जबकि 32% लोगों ने केजरीवाल के ऊपर मोदी को चुना।

Author नई दिल्ली | Updated: December 14, 2019 11:25 AM
मोदी को केजरीवाल ने पछाड़ा, 42% CM तो 32% ने PM को किया पसंद। (indian express)

दिल्ली में विधान सभा चुनाव से पहले बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आई है। दिल्ली के लोगों ने मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को पीएम मोदी की तुलना में अधिक पसंद किया है। लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे में जब मतदाताओं को चुनने के लिए कहा गया, तो 42% ने केजरीवाल को मोदी के ऊपर चुना जबकि 32% लोगों ने केजरीवाल के ऊपर मोदी को चुना। हालांकि, व्यक्तिगत लोकप्रियता के मामले में पीएम मोदी निश्चित रूप से दिल्ली के मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हैं। 30% लोगों ने मजबूती से कहा कि उन्हें मोदी पसंद हैं पर जब तुलनात्मक तौर पर पूछा गया तो केजरीवाल पीएम मोदी से आगे नमिकल गए।

यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्तर की राजनीति के बजाय दिल्ली के बारे में था। इसीलिए, जब मतदाताओं को चुनने के लिए कहा गया तो 42% लोगों ने केजरीवाल को मोदी के ऊपर चुना। यह सर्वे 22 नवंबर से 3 दिसंबर के बीच दिल्ली की 23 विधान सभा क्षेत्रों के कुल 115 जगहों पर किया गया। इस दौरान 2,298 मतदाताओं से राय ली गई।

सर्वे के मुताबिक आप सरकार के कामकाज से अधिकांश दिल्ली वाले संतुष्ट हैं। कुल 53 फीसदी लोगों ने केजरीवाल सरकार के काम पर खुशी जताई। सर्वे में 10 में से नौ मतदाताओं ने केजरीवाल सरकार के कामकाज पर संतोष जाहिर किया जबकि मात्र एक ने उस पर असंतोष जताया। अधिकांश मतदाताओं ने केजरीवाल सरकार द्वारा शिक्षा, चिकित्सा और ट्रांसपोर्ट में किए गए काम को सराहा।

सर्वे में कहा गया है कि चार में से हर तीन वोटर मोदी सरकार के कामकाज से भी खुश है लेकिन 20 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी, महंगाई और आथिक मोर्चे पर केंद्र सरकार की विफलताओं पर नाराजगी जाहिर की। ऐसे वोटरों का कहना था कि चुनावों में ये भी अहम मुद्दे होंगे। मोदी सरकार के परफॉरमेंस को 43 फीसदी वोटरों ने ही पसंद किया जो अब तक का सबसे कमतर प्रदर्शन है।

बता दें कि चुनावों से ऐन पहले बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने दिल्ली की करीब 1700 अवैध कॉलोनियों को वैध करने का ऐलान किया। यह सर्वे लोकसभा में अवैध कॉलोनी को वैध दर्जा देने वाले बिल के पारित होने से पहले किया गया है। संभव है कि वोटरों में इसे लेकर चुनावों से पहले सोच में बदलाव हो। फरवरी 2020 में विधान सभा चुनाव होने हैं।

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