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पौड़ी हत्याकांड से खुली ‘रिजार्ट’ संस्कृति की पोल

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड ने इस पर्वतीय राज्य की रिजार्ट संस्कृति की पोल खोल कर रख दी है।

पौड़ी हत्याकांड से खुली ‘रिजार्ट’ संस्कृति की पोल
प्रदर्शनकारियों ने आरोपी के स्वामित्व वाली आंवले प्रसंस्करण इकाई में आग लगा दी। फोटो पीटीआई।

आखिरकार अपनी अस्मिता को बचाने के लिए पहाड़ की खुद्दार बहादुर बेटी अंकिता भंडारी ने अपने जीते जी रिजार्ट संस्कृति के राजनीतिक रसूखदार संचालकों हत्यारोपी पुलकित आर्य और उसके दो साथियों के दबाव में आत्मसमर्पण नहीं किया बल्कि इन सफेदपोश राजनीतिक रसूखदारों का बहादुरी के साथ मुकाबला किया।

आखिर वह राजनीतिक रसूखदारों के हाथों मौत का शिकार हुई। अंकिता का मुख्य हत्यारा पुलकित आर्य भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे और राज्य सरकार के दर्जा धारी मंत्री रहे विनोद आर्य का बेटा है और उसका भाई भी राज्य की भाजपा सरकार में दर्जा धारी मंत्री था। इस घटना के बाद दोनों को मुख्यमंत्री के निर्देश पर पार्टी संगठन और दर्जा धारी मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया, परंतु पिता बेटे भाजपा के दामन पर दाग लगा गए और इस हत्याकांड से पूरा उत्तराखंड उबाल पर है। पूरे राज्य में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।

उत्तराखंड में रिजार्ट की भरमार

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार भूमि संबंधी कानूनों को तोड़ा मरोड़ा। पिछली सरकार ने तो भू कानूनों को इतना अधिक लचीला बना दिया कि उत्तराखंड और विभिन्न राज्यों के धन्ना सेठों ने उत्तराखंड के पर्यटन को तथाकथित रूप से बढ़ावा देने के लिए राज्य में भोग विलास की प्रतीक बनी रिजार्ट संस्कृति को बढ़ावा दिया।

उत्तराखंड के शहरों से लगे मैदानी और पहाड़ी जिलों के कई गांवों में रिजार्ट कुकुरमुत्तों की तरह उग आए और इस रिजार्ट संस्कृति ने देवभूमि उत्तराखंड के शांत और धार्मिक माहौल को खराब कर के रख दिया। इसका परिणाम अंकिता हत्याकांड के तौर पर सामने आया। अब राज्य सरकार ने राज्य में पनप रही रिजार्ट संस्कृति से दो-चार होने के लिए पर्यटन, प्रशासन और पुलिस विभाग को राज्य के सभी रिजार्ट और होटल तथा अतिथिगृहों की गतिविधियों की जांच का जिम्मा सौंपा है। अंकिता हत्याकांड के बाद पर्यटन, प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से राज्य में चल रहे अवैध होटलों और रिजार्ट की जांच का सघन अभियान चलाया हुआ है और अभी तक 12 से ज्यादा अवैध होटल और रिजार्ट पकड़ में आए हैं।

नैनीताल ,अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर, पौड़ी जिलों समेत कई जिलों में धड़ल्ले से अवैध तौर पर होटल, रिजार्ट और स्पा केंद्र चल रहे थे। पौड़ी गढ़वाल के यम्केश्वर विकासखंड के गंगा भोगपुर तल्ला गांव में स्थित अंकिता के हत्यारे पुलकित आर्य का वनंत्रा रिजार्ट भी अवैध रूप से चल रहा था। यह रिजार्ट बिना नक्शे के बनाया गया था और जिस जमीन पर यह बना हुआ था वह जमीन भाजपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व दर्जा धारी मंत्री विनोद आर्य ने अपनी स्वदेशी दवाखाने के लिए आवंटित करवाई थी।

पुलकित आर्य के रिजार्ट में काम करने वाली एक पूर्व महिला कर्मचारी और उसके पति ने बताया कि उन्होंने इस साल जुलाई तक तीन महीने इस रिजार्ट में काम किया परंतु यहां चल रही अवांछित गतिविधियों के कारण उन्होंने यहां से जुलाई में नौकरी छोड़ दी थी। इस दंपत्ति ने बताया कि इस क्षेत्र का राजस्व उप निरीक्षक यानी पटवारी रिजार्ट के मालिक पुलकित आर्य का जिगरी यार था और उसकी हर गतिविधि में शामिल रहता था। इस पटवारी को निलंबित कर दिया गया है।

हत्याकांड ने राजस्व पुलिस की खोली पोल

उत्तराखंड को राज्य बने हुए 22 साल हो गए हैं परंतु उत्तराखंड अभी तक अंग्रेजों की बनाई गई राजस्व पुलिस की व्यवस्था से निजात नहीं पा सका है उत्तराखंड के 61 फीसदी भूभाग में नागरिक पुलिस की जगह राजस्व पुलिस काम करती है और इस भूभाग में पुलिस का न कोई थाना है, न कोई नागरिक पुलिस और अंग्रेजों के जमाने 1874 से पुलिस का काम राजस्व पुलिस करती है यानी पटवारी, लेखपाल, कानूनगो और नायब तहसीलदार जैसे कर्मचारी और अधिकारी ही यहां राजस्व वसूली के साथ-साथ पुलिस का काम भी करते हैं।

कोई अपराध होने पर इन्हीं लोगों को एफआईआर भी दर्ज करनी पड़ती है, मामले की जांच-पड़ताल भी करनी होती है और अपराधियों की गिरफ्तारी भी इन्हीं के जिम्मे है। जबकि इनमें से किसी भी काम को करने के लिए इनके पास न तो कोई संसाधन होते हैं और न ही इनको इसका प्रशिक्षण दिया जाता है । उत्तराखंड के 7500 गांव राजस्व पुलिस के भरोसे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने राजस्व पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

अंकिता हत्याकांड के बाद राजस्व पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए और राजस्व पुलिस की नाकामी सामने आई इस जघन्य कांड ने राजस्व पुलिस की पोल खोल कर रख दी राजस्व पुलिस की भूमिका पर सबसे पहले सवाल उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उत्तराखंड से राजस्व पुलिस को तुरंत समाप्त करने और नागरिक पुलिस को कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपने की मांग की। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के गांव में नागरिक पुलिस की बजाए राजस्व पुलिस कानून व्यवस्था देखती है

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First published on: 28-09-2022 at 04:39:33 am