केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा है कि गगनयान और अन्य जरूरी मिशन/प्रोजेक्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के स्वैच्छिक रिटायरमेंट (वीआरएस) और इस्तीफों को पहले की तरह यानी सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार की सख्ती से यह साफ है कि गगनयान और अन्य राष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए नौकरी छोड़ना या वीआरएस लेना अब पहले की तरह आसान नहीं होगा।
यह खबर सामने आई थी कि इसरो से जुड़े 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है। इनमें बेंगलुरु स्थित यूआरएससी और तिरुवनंतपुरम स्थित वीएसएससी में सबसे अधिक लोगों ने इस्तीफा दिया है।
इससे पहले अंतरिक्ष विभाग ने इन मिशनों में काम कर रहे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के इस्तीफों और वीआरएस को लेकर सख्त नियम बनाने का निर्देश दिया था। अंतरिक्ष विभाग ने कहा था कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों/प्रोजेक्ट्स से जुड़े इसरो के ग्रुप ‘ए’ वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के द्वारा वीआरएस और इस्तीफे के अनुरोध की वजह से राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।
इसरो क्यों छोड़ रहे हैं वैज्ञानिक?
इस्तीफों की वजह से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है लेकिन सवाल यह है कि ऐसे वक्त में जब भारत अंतरिक्ष से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है तो वैज्ञानिक इसरो को क्यों छोड़ रहे हैं।
इसके पीछे यह वजह सामने आई है कि निजी कंपनियां प्रोफेशनल्स को अच्छा वेतन और तेजी से बदलते माहौल में काम करने के मौके देती हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप वैज्ञानिकों को करियर के शुरुआती दौर में ही लीडरशिप वाले रोल देते हैं। पिछले कुछ सालों में इसरो के कई रिटायर्ड और पूर्व सीनियर अफसरों ने एयरोस्पेस से जुड़े स्टार्टअप बनाए हैं या उनको सलाह देने का काम किया है। ऐसे में भारत के एयरोस्पेस इंजीनियरों के लिए नए रास्ते खुले हैं।
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देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। जल शक्ति मंत्रालय ने इसरो के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
