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संसद की जांच के दायरे में आ सकती है RBI, संसदीय समिति ने केंद्रीय बैंक के कामकाज की स्क्रूटनी का दिया प्रस्ताव

हाल के दिनों में पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे में मॉनिटरी पॉलिसी के ट्रांसमिशन को लेकर आरबीआई की अनुपयोगिता पर भी बहस का मुद्दा बना हुआ है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 15, 2019 12:39 PM
जयंत सिन्हा संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। (फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कामकाज जल्द ही संसद के दायरे में आ सकता है। संसद की स्थायी समिति ने वित्तीय संस्थानों का निरीक्षण व उनकी गुणवत्ता पर नजर रखने, मंहगाई को नियंत्रित करने वाले दिशानिर्देशों और बैंकिंग सिस्टम के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए इस आशय का प्रस्ताव रखा है।

लाइव मिंट की खबर के अनुसार वित्त मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष जयंत सिन्हा ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं। रिजर्व बैंक के गवर्नर को समिति के जरिये संसद को अपनी रिपोर्ट देनी है।  हाल के दिनों में पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

ऐसे में मॉनिटरी पॉलिसी के ट्रांसमिशन को लेकर आरबीआई की अनुपयोगिता पर भी बहस का मुद्दा बना हुआ है। सिन्हा ने कहा कि समिति आरबीआई को रिसोर्स ट्रांसफर से जुड़े मामलों में दखल नहीं देगी। यह मामला पहले  ही जालान समिति द्वारा देखा जा चुका है। आरबीआई के अलावा अन्य वित्तीय नियामक संस्थाएं भी संसदीय समिति के दायरे में आएंगी।

इनमें सिक्योरिटी एक्सजेंच बोर्ड ऑफ  इंडिया (सेबी), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, भारतीय दिवाला एवं दिवालिया बोर्ड, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) शामिल है। सिन्हा ने कहा कि समिति जिस क्षेत्रों की जांच करना चाहती है उनमें से एक यह भी है कि क्या भारत के विनियामक संस्थान पूरी तरह से सुसज्जित है और क्या 5 ट्रिलियन और इसके बाद 10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

सभी संस्थानों को लगातार सुधार करना होगा, खुद को निखारना होगा जिससे कि वे भविष्य की मांग के अनुरूप खुद को ढाल सकें। हालांकि, यह कदम भी आलोचना से परे नहीं है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पिछली लोकसभा के दौरान वित्त मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने कहा संसदीय समितियों की सीमित निगरानी होती है।

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