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जीएसटी से नाखुश रिजर्व बैंक को महंगाई बढ़ने की आशंका

विकास दर का अनुमान घटा दिया है और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौजूदा छमाही में जीएसटी के नकारात्मक असर को लेकर रिजर्व बैंक ने चिंता जताई है और सरकार को आगाह किया है कि राहत पैकेज देने में काफी सतर्कता बरतनी होगी।

Author नई दिल्ली | Published on: October 5, 2017 2:38 AM
(प्रतीकात्मक चित्र)

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सरकार के आर्थिक फैसलों पर उंगली उठाई है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है। वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन पर नाखुशी जताई है। विकास दर का अनुमान घटा दिया है और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौजूदा छमाही में जीएसटी के नकारात्मक असर को लेकर रिजर्व बैंक ने चिंता जताई है और सरकार को आगाह किया है कि राहत पैकेज देने में काफी सतर्कता बरतनी होगी। बैंक के संकेतों से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा खस्ताहाली के लिए ज्यादा खर्च ही जिम्मेदार है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बुधवार को आरबीआइ के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। इसमें महंगाई और अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया। इसे 6 फीसद ही रखा गया है। खाद्य महंगाई बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा के चलते रेपो रेट में कमी करने की संभावना न के बराबर थी। रेपो रेट कम न होने की वजह से बैंकों की ईएमआइ सस्ती नहीं होंगी। सस्ते कर्ज के दिवाली तोहफे का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगी है। बैंक ने विकास दर के अपने पिछले अनुमान को भी घटा दिया है। आरबीआइ ने विकास दर के अनुमान को 7.3 फीसद से घटाकर 6.7 बाकी फीसद कर दिया है। आरबीआइ ने अगस्त में 7.3 फीसद का अनुमान जारी किया था।

केंद्रीय बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में भी कोई बदलाव नहीं किया है। इसे चार फीसद ही रखा है। हालांकि समिति ने स्टैच्युअरी लिक्विडिटी रेट (एसएलआर, सांविधिक नकदी अनुपात) में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इसे 20 से 19.5 फीसद कर दिया है। एसएलआर वह दर होती है, जिसके आधार पर बैंकों को एक निश्चित फीसद फंड रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है। एसएलआर रेट में बदलाव से अब बैंकों को रिजर्व बैंक के पास कम धन रखना होगा। ऐसे में बैंकों को रिजर्व बैंक से मिलने वाले ब्याज में भी कटौती होगी। उन्हें अपने आय स्रोतों से ही कमाई करनी होगी। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया कि वह जीएसटी के क्रियान्वयन से खुश नहीं है। मौद्रिक समिति ने कहा है कि जीएसटी के लागू होने का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसकी वजह से उत्पादन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ी हैं। ऐसे में निवेश कम हो सकता है। पूंजी निवेशक पहले से ही दबाव में हैं। हालांकि, बैंक ने उम्मीद जताई कि दूसरी छमाही में नकारात्मक असर कम होगा और विकास को रफ्तार मिलेगी। इन स्थितियों में रिजर्व बैंक ने आशंका जताई है कि महंगाई अपने मौजूदा स्तर से और बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2017 की दूसरी छमाही में यह 4.2 से 4.6 के बीच रहेगी। बैंक ने कहा है कि किसानों को कर्ज माफी देने से राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा।

 

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