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योगेंद्र यादव जैसे लोग तांडव करते हैं, किसान नहीं धोखेबाज हैं, अर्नब बोले- मैं बीच की बात नहीं करता, देश तोड़ने के प्रयोग हो रहे

अर्नब ने किसान आंदोलन पर निशाना साधते हुए कहा, "ये आंदोलन नहीं है ये देश को तोड़ने का एक प्रयोग है। ऐसा ही प्रयोग इन्होंने सीएए-एनआरसी के दौरान किया था। फिर दिल्ली में दंगे हुए थे। फिर शाहीन बाग में भी ऐसे ही प्रयोग किए गए।"

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: January 28, 2021 11:52 AM
योगेंद्र यादव (फोटो-ANI)।

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान संगठनों का प्रदर्शन गणतंत्र दिवस के दिन अचानक ही उग्र हो उठा। दिल्ली के अधिकतर इलाकों में फैली हिंसा की वजह से किसानों के आंदोलन पर असर पड़ा है। कई लोगों ने हिंसा का विरोध भी किया है। रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी भी उन लोगों में हैं, जिन्होंने प्रदर्शन में हिंसा को लेकर किसान संगठनों का नेतृत्व कर रहे नेताओं पर निशाना साधा। अपने शो में अर्नब ने योगेंद्र यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सबसे बड़े धोखेबाज तो वो निकले, जो खुद को किसानों का नेता बनाते आ रहे हैं। ऐसे लोगों ने देश की राष्ट्रवादी सोच पर हमला किया है।

अर्नब ने दिल्ली में हुई हिंसा पर कहा कि जो लोग अब तक किसान आंदोलन के साथ खड़े थे, आज वो भी कह रहे हैं कि इस तरह की गुंडागर्दी करने वाले किसान हो ही नहीं सकते। ये गुंडे हैं। किसान खेतों में ट्रैक्टर चलाते हैं। सड़कों पर लोगों और महिलाओं के ऊपर ट्रैक्टर नहीं चलाते। किसान सड़कों पर तलवार लेकर हुड़दंग नहीं करते। किसान झुंड बनाकर पुलिसवालों पर हमला नहीं करते। महिला पुलिसकर्मियों पर हमला नहीं करते।

अर्नब यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “किसान कभी देश के खिलाफ नहीं हो सकते। दिल्ली दंगों पर जिस तरह योगेंद्र यादव जैसे लोगों ने तांडव किया, वे किसान नहीं हैं। जिन्होंने ये सब किया, जो खुद को किसानों का नेता बताते आ रहे हैं, वे सबसे बड़े धोखेबाज निकले। उन लोगों ने ही इस देश के साथ धोखा किया है। देश की राष्ट्रवादी सोच पर हमला किया है।”

रिपब्लिक टीवी के एडिटर ने किसान आंदोलन को राष्ट्रविरोधी बताते हुए कहा, “ये आंदोलन नहीं है ये देश को तोड़ने का एक प्रयोग है। ऐसा ही प्रयोग इन्होंने सीएए-एनआरसी के दौरान किया था। फिर दिल्ली में दंगे हुए थे। फिर शाहीन बाग में भी ऐसे ही प्रयोग किए गए। अब इन लोगों ने कृषि कानून की आड़ लेकर देश को लहूलुहान कर दिया। इनका गुनाह ऐसा था कि इन्हें माफ नहीं किया जा सकता। इनसे बातचीत नहीं हो सकती। इन्हें हटाना ही होगा। इन्हें इनके किए की सजा मिलनी ही चाहिए।”

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