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ये किसान नहीं हैं, ये कभी हो ही नहीं सकते…इन्होंने Republic को बंद कराने की कोशिश करी…हिंसा फैलाने वालों पर अंगुली दिखा चीखने लगे अर्णब

नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से सटे बॉर्डर पर पिछले करीब 3 महीने से किसानों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक किसान आंदोलन को लेकर ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।

farmers protestकिसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। (PTI)

रिपब्लिक भारत पर अपने डिबेट शो ‘पूछता है भारत’ में कहा कि ये किसान नहीं हो सकते, इन्होंने मेरे चैनल को बंद कराने की कोशिश की। दरअसल कार्यक्रम के शुरुआत में अर्णब गोस्वामी ने कहा कि ‘आज एक बात शीशे की तरफ साफ हो गई कि 26 जनवरी को दिल्ली में जो हिंसा हुई थी उसके पीछे बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश थी। विदेश में बैठकर दिल्ली को दंगे की आग में झोंकने का प्लान बनाया गया था। इस पूरी कड़ी को समझिए। पहले इन लोगों ने कहा कि ये तो किसान हैं। फिर हमने कहा कि किसान महिलाओं को नहीं पीटते, किसान खालिस्तान का समर्थन नहीं करते और किसान कभी विदेशियों के साथ मिलकर अपने देश के साथ षड्यंत्र नहीं करते।’

अर्णब ने आगे कहा कि ‘रिपब्लिक भारत ने पहले ही कहा था कि जिन लोगों ने किसान के नाम पर हिंसा फैलाने की कोशिश की ये किसान नहीं हैं. ये किसान कभी भी नहीं हो सकते हैं…ये देश विरोधी हैं। रिपब्लिक भारत शुरू से इन्हें बेनकाब करता आ रहा है। इसीलिए इन देश विरोधियों ने रिपब्लिक को टारगेट किया। दूसरे लुटियन मीडिया वालों के साथ हाथ मिलाकर इन्होंने इस चैनल को बंद कराने की कोशिश की। लेकिन हमारे साथ आपका प्यार है, मेरे साथ आपका समर्थन है, इसीलिए ये चैनल इन षड्यंत्रकारियों को हरा चुका है।’

बहरहाल आपको बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से सटे बॉर्डर पर पिछले करीब 3 महीने से किसानों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक किसान आंदोलन को लेकर ठोस नतीजा नहीं निकल सका है।

सड़क से लेकर संसद तक गरमा-गरम बहस के बाद भी बात नहीं बनी, तो किसानों ने अब आंदोलन का रुख बंगाल की तरफ मोड़ दिया है। बंगाल चलो का आह्वान महापंचायत के मंच से किया जा रहा है। आंदोलनकारी किसानों ने उनका समर्थन ना करने वालों के खिलाफ वोट की अपील है।

किसान आंदोलन राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। किसान आंदोलन से राजनीतिक नुकसान की आशंका को देखते हुए दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में मंगलवार को बैठक हुई। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल हुए।

इन नेताओं ने विधायकों और स्थानीय नेताओं से आग्रह किया कि वे इन क्षेत्रों में स्थानीय खापों, पंचायतों और सामुदायिक समूहों के साथ संपर्क करें ताकि पार्टी और सरकार की स्थिति को समझाया जा सके।

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